पाकिस्तान की जेलों में भारतीय नागरिक सरबजीतसिंह सहित पल-पल मौत के साए में जी रहे अन्य कैदियों को संभवत: जीवनदान मिल सकता है क्योंकि पाक सरकार उस प्रस्ताव पर काफी सक्रियता से विचार कर रही है, जिसमें सजा-ए-मौत को उम्रकैद में तब्दील करने की बात कही गई है।
डान अखबार ने एक सूत्र के हवाले से कहा गृह मंत्रालय द्वारा तैयार प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार चल रहा है और इस पर कुछ दिनों में फैसला लिए जाने की उम्मीद है।
सूत्र ने कहा कि इसका बड़ा लाभ सरबजीत को मिलेगा, जिसे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुए चार बम धमाकों के मामले में फाँसी की सजा सुनाई गई है। इन धमाकों में 14 लोग मारे गए थे।
पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी दया याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद उसे एक अप्रैल को फाँसी देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में भारत सरकार से नई अपील मिलने के बाद मुशर्रफ ने इसमें विलम्ब कर दिया ताकि पाक सरकार मामले की समीक्षा कर सके। सरबजीत के परिजन, जो इस समय पाकिस्तान में हैं, ने भी अलग से एक क्षमा याचिका मुशर्रफ को भेजी है।
बहन को दोबारा मिलने की उम्मीद : सरबजीत की बहन दलबीर कौर को आशा है कि वह जल्द ही दोबारा अपने भाई से जेल के बाहर मिल सकेगी। दलबीर कौर ने लाहौर की कोट लखपत जेल में अपने भाई से मुलाकात की। दलबीर के साथ सरबजीत की पत्नी और उसकी दो बेटियाँ भी अपने पिता से पहली बार मिलने पहुँची थीं।
दलबीर अपने भाई से 18 वर्ष बाद मिली थी। इसलिए वह अपने साथ 18 राखियाँ लेकर गई थी। कौर ने आज लाहौर से दूरभाष पर बताया कि मुलाकात बेहद भावनात्मक थी। सरबजीत अपनी कलाई पर राखी बँधवाने में बहुत संकोच कर रहे थे क्योंकि मुझे देने के लिए उनके पास कोई उपहार नहीं था।
कौर ने कहा मैं दुआ करती हूँ कि उनसे सलाखों के बाहर खुले में मिल सकूँगी। सरबजीत का परिवार जिस वीजा पर पाकिस्तान गया है वह एक सप्ताह के लिए वैध है। उन्हें लाहौर और ननकाना साहिब की यात्रा की अनुमति दी गई है।
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