पाकिस्तानी सरकार ने कहा है कि वह जासूसी के लिए फाँसी की सजा पाने वाले भारतीय मूल के सरबजीतसिंह की आम माफी की भारत सरकार की अपील पर गंभीरता से विचार कर रही है।
पाकिस्तान की जेल में 18 वर्षों से बंद सरबजीत के परिवार के लोग पहली बार गुरुवार को उनसे मिले थे। परिजनों की यह मुलाकात डेढ़ घंटे तक चली।
राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सरबजीतसिंह की दया याचिका पिछले महीने अस्वीकार कर दी थी, लेकिन भारत सरकार के अनुरोध पर फाँसी की सजा को 30 अप्रैल तक के लिए टाल दिया था।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक ने कहा कि इस मुद्दे पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमसे भारत सरकार ने आग्रह किया है और इस मामले में आने वाले समय में फैसला किया जाएगा।
सादिक का बयान ऐसे समय में आया है, जब सरबजीत की पत्नी, उसकी दोनों पुत्रियाँ, उसकी बहिन और बहनोई पाकिस्तान में हैं और उन्हें एक सप्ताह का वीजा मिला है।
सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने बाद में कहा कि हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि हम सरबजीत से 18 साल बाद ऐसी हालत में मिलेंगे। यह हमारे लिए दु:खदायी है लेकिन साथ ही खुशियों का क्षण भी है। हम पाकिस्तान सरकार से सरबजीत के लिए दया की अपील करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
सनद रहे कि सरबजीत को जासूसी और उस विस्फोट के लिए बम ले जाने का दोषी करार देकर फाँसी की सजा दी गई है, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी। दूसरी तरफ सरबजीतसिंह के परिवार वालों का कहना है सरबजीत 1990 में नशे की हालत में धोखे से पाकिस्तान की सीमा में चला गया था।
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