अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि वह इस समय तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से वार्ता करने में विफल रहता है तो इससे उदारवादी तिब्बत समर्थकों में कट्टरपंथ बढ़ेगा।
उपविदेश मंत्री जान नेग्रोपोंटे ने तिब्बत में चीन के दमनचक्र के संबंध में सीनेट को बताया यदि चीन ने अभी दलाई लामा से बातचीत शुरू नहीं की तो इससे केवल उन्हीं लोगों के हाथ मजबूत होंगे जो कट्टरपंथी विचारों की वकालत करते हैं।
उधर दलाई लामा ने चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ को पत्र लिखकर तिब्बत में तनाव कम करने के लिए अपने दूत भेजने की पेशकश की है।
दलाई लामा के विशेष दूत लोदी ने संवाददाताओं को बताया आध्यात्मिक नेता ने तिब्बत की स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जताई है और वहाँ हालात को सँभालने में मदद के लिए अपने दूतों को भेजने की पेशकश की है लेकिन इस पेशकश का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
गौरतलब है कि जानेमाने कट्टरपंथी और निर्वासित तिब्बती नेताओं ने तिब्बत में चीन के दमनचक्र के बाद दलाई लामा के स्वायत्तता की माँग को लेकर चलाए जा रहे अहिंसक अभियान की समीक्षा किए जाने की माँग की है।
नेग्रोपोंटे ने कहा कि चीन में प्रशासन के पास तिब्बत पर बात करने के लिए दलाई लामा से बेहतर कोई व्यक्ति नहीं है क्योंकि वह तिब्बती लोगों के अविवादित आध्यात्मिक नेता हैं।
उपविदेश मंत्री नेग्रोपोंटे ने कहा कि दलाई लामा शांति के प्रतीक पुरुष हैं। 72 वर्षीय दलाई लामा 1959 में एक विफल विद्रोह के बाद से तिब्बत छोड़कर उत्तर भारत में रह रहे हैं।
सीनेट इस मामले में चीन को दलाई लामा से बातचीत को बाध्य नहीं कर पाने में बुश प्रशासन की विफलता से नाराज है। नेग्रोपोंटे ने कहा चीनी सरकार को दलाई लामा के प्रतिनिधि तिब्बतियों से बातचीत करने का यह मौका नहीं गँवाना चाहिए जो हिंसा का विरोध कर रहे हैं लेकिन तिब्बत के लिए आजादी की माँग नहीं कर रहे हैं।
नेग्रोपोंटे ने चीन को यह भी चेतावनी दी कि तिब्बतियों की शिकायतों का समाधान और उनकी संस्कृति भाषा तथा धार्मिक आजादी को सुरक्षित रखने की दिशा में मिलकर काम किए बिना कम्युनिस्ट देश में शांति संभव नहीं है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति जार्ज बुश और अन्य सरकारी नेता तिब्बत संबंधी मुद्दे के समाधान के लिए बीजिंग पर दलाई लामा या उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करने का दबाव डाल रहे हैं लेकिन अभी तक ये प्रयास सफल नहीं हुए हैं।
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