पाकिस्तान में बम धमाकों के मामले में पल-पल मौत के साए में जी रहे भारतीय नागरिक सरबजीत का परिवार बुधवार को उससे मिलने और पाक सरकार से उसकी रिहाई की अपील करने के लिए पाकिस्तान पहुँचा।
वाघा सीमा पार करने के थोड़ी देर बाद उसकी पत्नी सुखप्रीत कौर और बेटियाँ स्वप्नदीप तथा पूनम ने सरबजीत को बेकसूर बताया और कहा कि बम धमाकों के मामले में उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है।
सरबजीत को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 1990 में हुए चार बम धमाकों के मामले में फाँसी की सजा सुनाई गई है, जिनमें 14 लोग मारे गए थे। सरबजीत के परिवार, उसकी बहन दलबीर कौर और उनके पति बलदेवसिंह को ननकाना साहिब तथा लाहौर की यात्रा के लिए सात दिन का वीसा दिया गया है। सरबजीत इस समय लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है।
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि सरबजीतसिंह मंजीतसिंह है जिसने विस्फोट किए। सरबजीत का परिवार पाकिस्तान के इस दावे का खंडन करता है कि वह जासूस है। परिवार का कहना है कि सरबजीत गलती से पाकिस्तानी क्षेत्र में चला गया था। सुखप्रीत कौर ने वाघा में कहा मेरे पति मंजीतसिंह नहीं हैं। वह सरबजीतसिंह और एक साधारण किसान हैं। वह नशे की हालत में गलती से सीमा पार कर गए। वह ऐसा काम कभी कर ही नहीं सकते जिसके लिए उन्हें सजा सुनाई गई है।
सुखप्रीत ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति को स्वतंत्र कराने के मेरे प्रयासों का हर कोई समर्थन करेगा। मैं उनसे 18 साल बाद मिलूँगी। मैंने कभी यह कल्पना भी नहीं की कि मैं उनसे इतने लंबे समय तक अलग रहूँगी। मेरे बच्चों ने उन्हें लंबे समय से नहीं देखा है।
पूनम उस समय मात्र 23 दिन की थी, जब उसके पिता ने सीमा पार की। पूनम ने कहा मैं अपने पिता के मुँह से अपना नाम सुनना चाहती हूँ और उनसे गले मिलना चाहती हूँ। मैं जानना चाहती हूँ कि पिता का प्यार क्या होता है।
पूनम ने कहा कि अपने पिता को स्वतंत्र कराने के लिए मैं हर किसी से मदद का आग्रह करती हूँ। हम पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से अपील करने आए हैं कि वे हमारे पिता को स्वतंत्र कराने में हमारी मदद करें क्योंकि वह निर्दोष हैं। हमें विश्वास है कि वह निश्चित तौर पर हमारी मदद करेंगे।
सरबजीत की बेटी स्वप्नदीप ने कहा कि जिस समय उसके पिता गलती से पाकिस्तान में घुसे उस समय वह सिर्फ ढाई साल की थी। उसने कहा कि हम इस उम्मीद के साथ आए हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच सुधर रहे रिश्तों का असर मेरे पिता के मामले पर पड़ेगा और उन्हें जल्द रिहा कर दिया जाएगा।
अपने पिता पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए उसने कहा कि मेरे पिता सिर्फ साधारण किसान हैं, जो गलती से पाकिस्तान में घुस गए। उस समय सीमा पर बाड़ नहीं लगी थी। वे पाकिस्तान की जेल में 18 साल गुजार चुके हैं, जो उम्रकैद से भी अधिक है।
उसने कहा कि पिता से मिलने के लिए पाकिस्तान आने की इजाजत मिलने पर वह खुश भी है और दुखी भी। स्वप्नदीप ने कहा कि मैंने यह कभी नहीं सोचा कि पिता से इस तरह मुलाकात होगी। हम हमेशा प्रार्थना करते हैं कि वह लौटकर आएँ और हमारे साथ दिवाली तथा होली मनाएँ।
पूनम ने कहा हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि हमारे पिता सरबजीत हैं न कि वह मनजीतसिंह जिसने धमाके किए। एक निर्दोष आदमी ने 18 साल जेल में गुजारे हैं जिसे अब रिहा कर दिया जाना चाहिए। सिर्फ मेरे पिता ही नहीं बल्कि भारतीय जेलों में बंद सभी पाकिस्तानी कैदियों को रिहा कर दिया जाना चाहिए।
सरबजीत की बेटियों ने कहा कि वे बम धमाकों में मारे गए लोगों के परिजन से भी मिलने की कोशिश करेंगी और उन्हें अपने पिता के निर्दोष होने के बारे में समझाने की कोशिश करेंगी। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि परिवार को सरबजीत से मिलने की अनुमति कब दी जाएगी।
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