जो महिलाएँ पुत्ररत्न के लिए लालयित हैं उन्हें गर्भधारण के काल में नाश्ते में ढेर सारे अनाज और केले लेने चाहिए। साथ ही उन्हें अच्छी खासी मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए।
इसे आप सदियों से चले आ रहे नानी-दादी के घरेलू नुस्खे कह कर टाल नहीं दें, क्योंकि अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने भी इस तथ्य को उजागर कर दिया है कि गर्भवती महिला के खान-पान और उसके पेट में पल रहे बच्चे के लिंग में कुछ रिश्ता है।
विज्ञान पत्रिका बॉयोलोजिकल साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एक्सेटर यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने पाया कि गर्भधारण के समय महिलाओं के भोजन से उसके शिशुओं का लिंग प्रभावित हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने इस क्रम में पुत्ररत्न के लिए लालयित महिलाओं को गर्भधारण के काल में नाश्ते में ढेर सारे अनाज और केले का सेवन करने की सलाह दी है।
उनकी यह भी सलाह है कि ऐसी महिलाओं को अच्छी खासी मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए। साथ ही उन्हें समग्र दैनिक भोजन में 400 कैलोरी का इजाफा करना चाहिए। यह एक वक्त के खाने के बराबर है।
एक्सेटर यूनिवर्सिटी की प्रमुख अनुसंधानकर्ता फायोना मैथ्यूस ने कहा कि हमारे पास प्राकृतिक तंत्र का साक्ष्य है, जिसके अनुसार महिला अपने भोजन के माध्यम से अपने शिशु के लिंग को पहले से ही नियंत्रित करती प्रतीत होती हैं।
इस अध्ययन के क्रम में ब्रिटेन में पहली बार गर्भधारण करने वाली 740 महिलाओं पर केन्द्रित किया गया है। इन महिलाओं से कहा गया था कि वह गर्भधारण की प्राथमिक अवस्था में अपने खान-पान के बारे में सूचनाएँ दे।
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि गर्भधारण के लगभग के काल में उच्चतम कैलोरी वाले भोजन का सेवन करने वाली 56 प्रतिशत महिलाएँ बेटे की माँ बनी। इसके मुकाबले कम ऊर्जा वाला भोजन ग्रहण करने वाली महिलाओं में से केवल 45 प्रतिशत को ही बेटा पैदा हुआ।
अध्ययन के अनुसार बेटे की माँ बनी महिलाओं में से ज्यादातर ने ना सिर्फ कैल्शियम पोटैशियम और विटामिन सी, ई और बी-12 समेत पोषक तत्वों की ज्यादा उच्च मात्रा ली, बल्कि ज्यादा विविध पोषक तत्वों का भी सेवन किया।
फायोना कहती हैं अगर माता के पास प्रचूर संसाधन हैं तो बेटा पैदा कने में निवेश करने का मतलब है, क्योंकि वह बेटा, बेटी के मुकाबले ज्यादा पोता-पोती पैदा करेगा। बहरहाल वहा आगाह करती हैं, लेकिन कम संसाधन होने पर बेटी पैदा करना सुरक्षित होगा।
|