वर्ष 2012 तक वैज्ञानिक पद्धति इन विट्रो से पशु माँस बनाने वाले को पशु अधिकार संगठन पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) 10 लाख डॉलर का इनाम देगा, बशर्ते इसका स्वाद और दिखावट बिलकुल असली माँस के समान हो।
पेटा ने एक वक्तव्य में कहा है कि इन विट्रो मीट उत्पन्न करने के लिए पशुओं के स्टेम सेलों का प्रयोग किया जाएगा। इन सेल्स को एक माध्यम में विकसित किया जाएगा, जो पकाने और खाने योग्य कृत्रिम माँस के रूप में विकसित होगा।
पेटा द्वारा यह इनाम उस प्रतिभागी को जाएगा, जो वर्ष 2012 तक टेस्ट ट्यूब चिकन का व्यवसायिक उत्पादन कर उसे कम से कम 10 अमेरिकी डॉलर में सफलतापूर्वक बेचेगा।
विश्व के अनेक अनुसंधानकर्ता वैज्ञानिक पद्धति से माँस उत्पन्न करने की पहले से ही कोशिश कर रहे हैं पर अभी भी इन विट्रो माँस को रसोईघर तक आने में कई वर्ष लगेंगे।
पेटा द्वारा आयोजित इस प्रतिस्पर्धा में जीतने के लिए 100 में से कम से कम 80 अंक लाने होंगे। 10 पेटा सदस्यों का एक समूह आवेदकों द्वारा प्रस्तुत माँस को चखेंगे, जिसका स्वाद और दिखावट असली चिकन के समान होनी चाहिए।
पेटा के अनुसार अकेले अमेरिका में ही प्रतिवर्ष 40 अरब मुर्गियों, मछलियों, सूअरों और गायों को भोजन के लिए वीभत्स तरीके से मार डाला जाता है। मीट व्यापार से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी विट्रो मीट की सहायता से कम किया जा सकता है।
पेटा का कहना है कि मनुष्यों को माँस खाने की जरा भी आवश्यकता नहीं है, फिर भी अनेक लोग माँसाहार की अपनी आदत को नहीं छोड़ना चाहते हैं। पेटा ऐसे लोगों की सहायता करना चाहता है और बताना चाहता है कि माँस न खाने का कोई नुकसान नहीं है।
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