भारत में 1857 के युद्ध के दौरान नायक की भूमिका अदा करने वाले कारपोरल राबर्ट ग्रांट को 150 साल पहले बिना किसी पहचान के कब्र में दफना दिया गया था, लेकिन अब ब्रिटिश सरकार ने उनकी कब्र पर पत्थर लगवाने का फैसला किया है, जिसमें उनकी शौर्य गाथा का भी जिक्र किया जाएगा। नार्थम्बरलैंड रायल रेजीमेंट आफ फ्यूजिलियर्स (ब्रिटिश सेना की एक इन्फैंट्री रेजीमेंट) में सेवारत रहे ग्रांट को 1857 के संग्राम के दौरान युद्ध क्षेत्र से एक घायल साथी को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के चलते विक्टोरिया क्रास से सम्मानित किया गया है। ग्रांट को मरणोपरांत दिए गए प्रशस्ति पत्र में कहा गया है 24 सितंबर 1857 को आलमबाग में ग्रांट ने बहादुरी का परिचय देते हुए भारी गोलीबारी के बीच आगे बढ़कर प्राइवेट डेवेनी की जान बचाई जिसका पैर गोलीबारी के कारण नष्ट हो गया था।
ग्रांट अंतत: डेवेनी को सुरक्षित कैंप तक पहुँचाने में सफल हो गया। भारत में अपनी सेवाएँ देने के बाद ग्रांट वापस इंग्लैंड लौट गए थे और उत्तरी लंदन के कामदेन इलाके में तीन साल तक मेट्रोपोलिटन पुलिस की सेवा में रहे। उनका अंत समय काफी तंगहाली में बीता।
हालाँकि जिस समय ग्रांट ने दुनिया को अलविदा कहा, उनकी जेब में एक कौड़ी भी नहीं थी और उन्हें नौ अन्य लोगों के साथ हाईगेट कब्रिस्तान में दफना दिया गया। जून में अब एक समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ग्रांट को स्थानीय पुलिस अधिकारी तथा उनकी रेजीमेंट उन्हें मरणोपरांत सम्मानित करेगी। इस सम्मान के तहत ग्रांट की कब्र पर एक सुंदर पत्थर लगाया जाएगा। मेट्रोपोलिटन पुलिस आयुक्त सर इयान ब्लेयर ग्रांट को सम्मानित करने के लिए इस पत्थर का अनावरण करेंगे। अपराध निवारण अधिकारी डेव किंग ने बताया हमें इस बात की खुशी है कि ग्रांट को सम्मान मिल रहा है। यह उनकी शानदार उपलब्धि का सम्मान है।
फ्रेंड्स ऑफ हाईगेट कब्रिस्तान के न्यासी जान ओक्स ने बताया यह निश्चित रूप से एक दुखद कहानी है कि एक व्यक्ति जिसने देश के लिए इतना किया, उसे बिना किसी पहचान के गुमनाम कब्र में दफना दिया गया। हमें उम्मीद है कि यह समारोह उन्हें सम्मानित करने के लिए उचित होगा।
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