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मैक्सिको में गूँजी गाँधीजी की रामधुन
मैक्सिको की राजधानी मैक्सिको सिटी में विश्व शांति एवं अहिंसा के दूत राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्रसिद्ध रामधुन 'रघुपति राघव राजा राम' का गायन और उसमें मैक्सिको के समाज के प्रत्येक वर्ग और बुद्धिजीवियों की भागीदारी। आखिर यह चौंकाने वाली बात नहीं है तो और क्या है।

शहर के बीचोबीच राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्रतिमा के नीचे उनके अनुयायियों ने एक संगीतपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें मैक्सिको दौरे पर आईं राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने हिस्सा लिया। श्रीमती पाटिल ने गाँधीजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

सांस्कृतिक संस्था ओरावर्ल्ड मांडला द्वारा शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने स्पेनिश भाषा में भजन गाए और बच्चों ने बड़े-बुजुर्गों के साथ गाँधीजी के प्रिय भजन 'रघुपति राघव राजा राम' को स्वरबद्ध कर समाँ बाँध दिया।

भजन-कीर्तन के इस कार्यक्रम में सभी धर्मों और संप्रदाय के लोगों ने हिस्सा लिया तथा खासतौर से बच्चों ने तिरंगा लहराकर श्रीमती पाटिल और उनके साथ आए भारतीय शिष्टमंडल का स्वागत किया।

पूरे कार्यक्रम को गाँधीवादी परंपरा का पुट देने के लिए एक ओर जहाँ गाँधीजी की प्रतिमा के सामने मिट्टी का लेप लगाकर राष्ट्रपति के आगमन का मार्ग बनाया गया था, वहीं चंदन की धूपबत्तियों से सारा वातावरण सुगंधित हो रहा था। शंख, ढोल, मँजीरा, हारमोनियम के साथ मैक्सिको के वाद्य यंत्रों के बेजोड़ संगम ने सबका मन मोह लिया।

इस मौके पर श्रीमती पाटिल ने कहा कि भले ही महात्मा गाँधी का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन उनका पूरी दुनिया से नाता था। दुनिया के हर कोने में 70 देशों में गाँधीजी की प्रतिमा स्थापित की गई है। गाँधीजी की विचारधारा उन सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है जो सोचते हैं कि वे कमजोर और शक्तिविहीन हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मैक्सिको शहर के बीचोबीच गाँधीजी की प्रतिमा लगाना दरअसल उनकी स्मृति और सिद्धांतों को सम्मान देना है जिसके लिए वह अडिग रहे। इस सम्मान की उन लोगों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जो दुनिया में शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पाटिल ने समारोह में बच्चों की मौजूदगी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य उनका है और यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उन्हें सहिष्णुता और सद्भाव के सिद्धांतों से अवगत कराएँ। उन्होंने कहा कि गाँधीजी सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को सरहद से परे रखना चाहते थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने पिछले वर्ष दो अक्टूबर को उनके जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया था। यह महात्मा गाँधी की दुनियाभर में स्वीकार्यता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल से चले जाने के बाद भी 'रघुपति राघव राजा राम' प्रार्थना होती रही और गाँधीजी की प्रतिमा के आसपास सारे वातावरण में चंदन की खुशबू तैरती रही।
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