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आपातकाल तीन महीने और बढ़ाया
थाइलैंड के मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को विद्रोह प्रभावित देश के दक्षिणी राज्यों में आपातकाल का विस्तार कर इसे और तीन माह तक जारी रखने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री सामक सुंदरावेज ने कहा कि जुलाई 2005 से ही आपातकाल लागू था। यह हमेशा जारी नहीं रहेगा, लेकिन अभी यह जरूरी है।

हर तीन माह पर देश में आपातकालीन शक्तियों की समीक्षा मंत्रिमंडल द्वारा की जाती है। 2004 से भड़की हिंसा के बाद से विद्रोही गतिविधियों में याला पट्टानी तथा नाराथिवाट में तीन हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। बौद्ध बहुल सुदूर दक्षिण में रहने वाले मुसलमान सरकार पर शिक्षा तथा रोजगार में भेद भाव का आरोप लगाते रहे हैं।

देश में आपातकाल से सरकार को कर्फ्यू लगाने, लोगों को सभा करने से रोकने, निंदा करने वाले प्रकाशनों को प्रतिबंधित करने, संदिग्धों को बिना आरोप गिरफ्तार करने, टेलीफोनों की टेपिंग तथा संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिल जाता है।

इन क्षेत्रों में सरकार को हत्याओं की छूट भी मिल जाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आपातकाल जारी रखने की कड़ी निंदा की है। इससे हिंसा पर रोक लगाने में मदद नहीं मिलती, बल्कि स्थितियाँ विकट हो जाती हैं तथा संवैधनिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।

आज का यह निर्णय तब आया है जब 2006 में सेना द्वारा तख्तापलट के बाद देश में लगा मार्शल लॉ दक्षिणी भागों को छोड़कर सुरक्षा परिषद द्वारा उठा लिया गया। देश के 76 राज्यों में से आधे से अधिक सेना द्वारा तख्तापलट के बाद से लगा मार्शल लॉ हटाया जा चुका है। कल 31 राज्यों के 179 जिलों से मार्शल ला हटाया गया।
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