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खुद शुगर लेवल जाँचना खतरनाक!
मधुमेह रोगियों को अब सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि रक्त में शर्करा के स्तर की खुद जाँच करना हो सकता है खतरनाक। अपने शर्करा स्तर को नियंत्रित रखें, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह आपको फायदे के बजाए नुकसान अधिक कर सकता है।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित कई अध्ययन रिपोर्टो से पता चलता है कि जिन लोगों को टाइप दो प्रकार का मधुमेह है और जो नियमित रूप से खुद अपने शर्करा स्तर की जाँच करते हैं उनके तनाव से गुजरने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

दुनिया में सर्वाधिक लोग टाइप दो प्रकार के मधुमेह से पीड़ित हैं। यह स्थिति तब आती है जब शरीर अधिक मात्रा में शर्करा को उर्जा में बदलने के लिए पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन बंद कर देता है। एक शोध में पाया गया है कि जो रोगी घर पर ही शर्करा के स्तर की जाँच करते हैं उनके बेचैनी और हताशा का शिकार होने की आशंका अधिक होती है।

ब्रिटिश दैनिक 'दी डेली टेलीग्राफ' ने आज प्रकाशित रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। एक अन्य शोधकर्ता का दावा है कि शर्करा के स्तर की नियमित जाँच स्थिति पर नियंत्रण पाने में मदद नहीं करती। यूनिवर्सिटी ऑफ यूल्स्टर के डॉ मौरीस ओ केन तथा उनके सहयोगियों ने एक साल तक इस दिशा में अध्ययन किया और पाया कि रक्त में शर्करा के स्तर की नियमित जाँच से हाइपोग्लीकेमिया दौरे पड़ने की संख्या में कोई अंतर नहीं आता।

स्थिति में सुधार के बजाय खुद शर्करा स्तर जाँचने वाले रोगी हताशा और बेचैनी अधिक होने की शिकायत करते पाए गए। एक अलग अध्ययन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ जुडिथ सिमोन तथा सहयोगियों ने कहा कि खुद जाँच करने वाले उपकरणों पर अधिक खर्च करने से मरीजों के स्वास्थ्य में कोई अतिरिक्त सुधार नहीं होता।
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