'यह आदमी नहीं मशीन है' कि कहावत जल्द ही गलत साबित होने जा रही है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने ऐसी मशीनें बनानी शुरू कर दी हैं जिनमें मनुष्यों के समान ही भावनाएँ होंगी और वह आपकी हर बात पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर सकेंगी।
साइंस डेली में प्रकाशित खबरों में यूरोपीय संघ द्वारा प्रायोजित एक अनुसंधान योजना का हवाला देते हुए कहा गया है कि वैज्ञानिकों में ऐसी मशीनें बनाने का विचार इस लिए आया, क्योंकि उनका मानना है कि भावनाएँ संवाद-संप्रेषण का अहम हिस्सा होती हैं लेकिन चूँकी मशीनें भावशून्य होती है, इसलिए उनका इस्तेमाल करने वालों को यह पता नहीं चल पाता कि वे इसका सही इस्तेमाल कर रहे हैं या गलत।
अनुसंधान के प्रोफेसर रोडी कोवी के मुताबिक इसके लिए इन मशीनों में मानवीय भावनाओं से जुडे हजारों आँकड़े संकलित किए जाएँगे। किन परिस्थितियों में मनुष्य कैसा व्यवहार करते हैं इसकी सारी जानकारी इनमें डाली जाएगी, ताकि जब इनके साथ ऐसा कोई व्यवहार हो तो वह मनुष्यों के समान ही अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर सकें।
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