कहा जाता है कि पुरुष मंगल ग्रह से और महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं, पर ऑक्सफोर्ड में हुए एक अनुसंधान के मुताबिक हो सकता है दोनों एक ही ग्रह के निवासी रहे हों।
कई बार महिला और पुरुषों के व्यवहार में इतना अंतर होता है कि लगता है जैसे दोनों अलग-अलग ग्रहों से आए हों पर एक नए अध्ययन के मुताबिक दोनों के ही मस्तिष्क का काफी बड़ा हिस्सा द्विलिंगी होता है।
अध्ययन में फलों पर भिनभिनाने वाली मक्खी के यौन संबंधी व्यवहार को जाना गया जिसमें पता चला कि नर मक्खी मादा को आकर्षित करने के लिए अपने एक पंख को हिलाकर भिन्न प्रकार की आवाज निकालती है। इससे मादा मक्खी उसे संयोजन की अनुमति देती है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. गेरो मैसेनबोक के मुताबिक यह समझा जाता है कि दोनों लिंगों के मस्तिष्क की बनावट भिन्न होती है, पर वास्तव में ऐसा लगता नहीं है। बल्कि दोनों ही लिंगों में द्विलिंगी मस्तिष्क होता है, जिसकी कुछ जटिलताएँ नर और मादा के अलग-अलग व्यवहार के लिए जिम्मेदार होती हैं।
मैसेनबोक ने अपने सहयोगियों के साथ एक नई प्रकार की रिसर्च की थी, जिसमें लेजर बीम की मदद से मक्खियों की कुछ हरकतों से उनके व्यवहार का पता लगाया गया था।
अनुसंधानकर्ताओं ने मधुर आवाज निकालने वाले व्यवहार की जाँच के लिए एक तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने पाया कि न्यूरान का एक समूह इस प्रकार के व्यवहार का नियंत्रण करता है और एक विशेष जीन उत्पाद को बनाता है जो कि इस लिंग निर्धारण व्यवहार के लिए जिम्मेदार होता है।
लेजर प्रक्रिया से अनुसंधानकार्ताओं ने नर मक्खी के गीत गाने के व्यवहार को जाना और इस बात में रुचि दिखाई कि मादा मक्खी भी इस प्रकार का व्यवहार करती है या नहीं। उन्होंने पता लगाया कि मादा मक्खी भी गाना गाती है पर उसकी आवाज नर मक्खी के समान सुरीली नहीं होती है। इससे पता चला कि नर मक्खी द्वारा किए जाने वाले इस व्यवहार के सर्किट मादा मक्खी के मस्तिष्क में भी मौजूद थे पर मादा मक्खियाँ उसका इस्तेमाल नर मक्खी के समान नहीं करती थी।
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार नर और मादा मक्खी के व्यवहार में न्यूरान आधारित व्यवहार का अंतर मुख्य रहस्य है। यह अंतर काफी गूढ़ है। जब दोनों के मस्तिष्क में समान न्यूरान काम करते हैं तो फिर इनके व्यवहार में इतना अधिक अंतर क्यों है।
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