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पाटील ने किया ब्राजील की सीनेट को संबोधित
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने बुधवार को ब्राजील की सीनेट को संबोधित किया, लेकिन इस दौरान अधिकांश कुर्सियाँ खाली रहने के कारण भारतीय दूतावास के अधिकारियों के चेहरे फक्क नजर आए।

राष्ट्रपति के संबोधन के समय कम उपस्थिति से नाखुश राष्ट्रपति कार्यालय ने भारतीय दूत हरदीपसिंह पुरी को इसके कारण जानने के लिए तलब किया।

मंगलवार को राष्ट्रपति पाटिल के अभिवादन के लिए सीनेट के 81 में से महज 15 सदस्य ही मौजूद थे। पहली पंक्ति में केंद्रीय मंत्री विलासराव मुट्टेमवर राष्ट्रपति के पति देवीसिंह शेखावत और पुरी बैठे थे।

ब्राजील सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विशेष सत्रों में कम उपस्थिति असामान्य घटना नहीं है क्योंकि इनमें केवल राजनीतिक दलों के नेताओं को ही आमंत्रित किया जाता है। इसी तरह का नजरिया भारत में ब्राजील के दूत मार्को एंटोनियो डिनिज ब्रांडेओ ने भी रखा है।

राष्ट्रपति कार्यालय इस तरह के विचारों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। कार्यालय ने इसे राष्ट्र प्रमुख के सम्मान की दृष्टि से ठीक नहीं बताया है।

अपने संबोधन में पाटिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार में भारत को स्थायी सदस्यता देने पर जोर दिया। उन्होंने जी-4 देशों भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के समूह के समन्वय के साथ संरा की उच्च इकाई में जगह पाने का समर्थन किया।

पाटिल ने निचले सदन को भी संबोधित किया जहाँ उनका परिचय सदन के सदस्यों से कराया गया। यहाँ उन्होंने भारत और ब्राजील के बीच गठबंधन में और सुधार लाने को लेकर संक्षिप्त भाषण दिया। इस सदन में भी मौजूदगी कम ही रही।
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