आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि बुधवार को जंगलों में रहने वाले हाथी के पुरखे कभी जलचर होते थे। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का एक दल तीन करोड़ 70 लाख वर्ष पहले की हाथी की दो प्रजातियों मोरीथेरियम और बैरीथेरियम जो इओसिन समय में थे, की जीवनचर्या पर शोध करते हुए इस नतीजे पर पहुँचा है। मोरीथेरियम के दाँतों में मौजूद समस्थानिकों का विश्लेषण करते हुए वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि ये बहुत कुछ अर्द्धजल में रहने वाले स्तनधारियों के समान थे। जल में ये नए जलीय पौधों को खाकर अपना दिन गुजारते थे।
इस सप्ताह एक ऑनलाइन अनुसंधान रिपोर्ट के मुख्य लेखक और ऑक्सफोर्ड के भूमि विज्ञान विभाग के अलेक्जेंडर लियू ने कहा कि आणविक आँकड़ों से पता चलता है कि आज के हाथियों की पुराने सीरेनियंस के साथ साझी विरासत है।
आँकड़ों के अनुसार हाथियों के पूर्वज जल और भूमि पर समान रूप से विचरण करने वाले रहे होंगे और हम जानना चाहते हैं कि क्या मोरीथेरियम या बैरीथेरियम का इस अर्द्धजलीय जीव से संबंध था।
लियू ने कहा कि दुर्भाग्य से इन पुराने हाथियों के कंकाल के कुछ छोटे टुकड़े ही बचे हैं। इसलिए हम उनकी हड्डियों पर गौर करने के बजाय उनके दाँतों की रासायनिक बनावट पर गौर करते हैं ताकि पता चल सके कि वे क्या खाते थे और कैसे रहते थे।
कार्बन समस्थानिकों से जानवरों के भोजन के बारे में पता चलता है। दाँतों में पाए जाने वाले ऑक्सीजन समस्थानिक स्थानीय जल स्रोतों आते हैं और इन समस्थानिकों का अलग-अलग होना जानवरों के आवासीय पर्यावरण का संकेत देता है।
विशेषज्ञों ने इन समस्थानिकों के अनुपातों की तुलना उसी समय के पूर्णत: स्थलीय जीवों से की और परिणामों की तुलना में पता चला कि मोरीथेरियम अर्द्धजलीय होते थे।
लियू ने कहा कि अब हम पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर कह सकते हैं कि आज के हाथी के पूर्वज प्राचीनकाल में पानी में रहते थे। उन्होंने कहा कि अब हमारा अगला कदम इसी तरह के दूसरे हाथियों के पूर्वजों पर विश्लेषण कर पता लगाना है कि कब वे पानी से जमीन की ओर उन्मुख हुए।
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