सैकड़ों अफगानिस्तानी नागरिक अपने वतन लौटने के लिए पाकिस्तान के उत्तर पूर्वी प्रांत पेशावर को छोड़ने की तैयारी में हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी समिति के मुताबिक स्थानीय आदिवासी समुदायों के बीच झगड़े के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सड़क बंद हो जाने से ये शरणार्थी असहाय हो गए थे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अपने वतन लौटने की प्रक्रिया शुरू कर चुके 360 अफगानिस्तानी परिवार पेशावर तोरखम मार्ग बंद होने के कारण सोमवार को शहर नहीं छोड़ सके।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने और परिवारों को असहाय होने से बचाने के लिए वतन वापसी के अभियान को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है। यूएनएचसीआर के प्रवक्ता रोन रेडमोंड ने बताया कि एक बार सड़क मार्ग शुरू होने पर वापसी की प्रक्रिया में मदद फिर से शुरू कर दी जाएगी।
सड़क बंद होने के मायने यह भी हैं कि उत्तरपूर्वी सीमावर्ती प्रांत पेशावर के जालोजाई शरणार्थी शिविर में रह रहे लोगों की वतन वापसी में और समय लगेगा। इन शिविरों को बंद करने की समयावधि मंगलवार को खत्म हो चुकी है।
रेडमोंड ने कहा कि यूएनएचसीआर यह स्वीकार करता है कि पूर्व में हुई रजामंदी के मुताबिक जालोजाई शिविर को बंद करना चाहिए और वहाँ रह रहे शरणार्थियों को समय पर शिविर छोड़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि पाकिस्तानी सरकार पेशावर तोरखम मार्ग के बंद होने की स्थिति को देखते हुए लोगों को थोड़ा और समय देगीं। सात सौ से भी ज्यादा अफगानिस्तानी नागरिकों को स्वेच्छा से वतन वापसी करने या पाकिस्तान के मौजूदा शरणार्थी ग्राम में चले जाने का विकल्प दिया गया है। हाल ही के हफ्तों में 3000 से भी ज्यादा लोगों ने वतन वापसी की है, जबकि 30 से भी अधिक परिवारों से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित कोट चंदना शरणार्थी ग्राम में बस जाने को कहा गया है।
रेडमोंड ने कहा कि पाकिस्तानी प्रशासन ने हमें यह विश्वास दिलाया है कि जिन घरों में अभी भी लोग रह रहे हैं उन्हें तोड़ा नहीं जाएगा और भोजन, पानी तथा बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी तब तक उपलब्ध कराई जाएगी जब तक आखिरी शरणार्थी चला नहीं जाता।
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