खाद्य पदार्थों के तेजी से बढ़ते दामों और कठोर आव्रजन नियमों के कारण ब्रिटेन के कई रेस्टोरेंट्स को ब्रिटेन का राष्ट्रीय व्यंजन कहे जाने वाले चिकन टिक्का मसाला को अपने मेन्यू में से हटाना पड़ा है।
भारतीय रेस्टोरेंट व्यवसाय की इस मजबूरी के पीछे बासमती चावल के बढ़ते दाम अकेले जिम्मेदार नहीं है बल्कि यहाँ के कठोर आव्रजन नियमों के कारण भारतीय उपमहाद्वीप से शेफों को नौकरी पर रखना भी मुश्किल हो गया है।
पूर्व विदेश मंत्री राबिन कुक ने एक घोषणा की थी जिससे ब्रिटेन में चिकन टिक्का मसाला की लोकप्रियता का पता चलता है। कुक ने कहा था कि अपनी लोकप्रियता के कारण चिकन टिक्का मसाला ब्रिटेन का राष्ट्रीय व्यंजन बन चुका है।
रेस्टोरेंट और सुपर मार्केट में पकाया हुआ मिलने के बाद से चिकन टिक्का मसाला यहाँ के अधिकतर लोगों को अपना दीवाना बना चुका है।
बंग्लादेशी रेस्टोरेंट व्यवसायी संगठन के अध्यक्ष और ले राज रेस्टोरेंट के मालिक इनाम अली का कहना है कि इस व्यवसाय में रहते हुए पिछले तीस वर्षों में उन्होंने कभी भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में इतनी तेजी से वृद्धि होते नहीं देखी है।
उन्होंने कहा कि मात्र छह सप्ताह में चावल की कीमतें 18 पौंड से 36 पौंड यानी दोगुनी हो गई हैं। चिकन की कीमतें भी 25 पौंड से 32 पौंड हो गई है। चिकन टिक्का मसाला बनाने में काम आने वाली अन्य सामग्री जैसे घी, मसाले आदि की कीमतें भी बहुत ज्यादा बढ़ी हैं।
इनाम अली ने बताया कि मूल्यों में वृद्धि के कारण ले राज के मेन्यू में से इस व्यंजन को हटा दिया जाएगा। कुछ समय तक चिकन टिक्का मसाला मेन्यू में था पर इसकी कीमत 8.50 पौंड से बढ़कर 9.50 पौंड हो गई थी।
अली के अनुसार चावल के बढ़ते दाम एक बड़ी समस्या है क्योंकि उनके 99 प्रतिशत ग्राहक चावल ही खाते हैं। घाटा होने से उन्होंने कई व्यंजनों में बदलाव करना शुरू कर दिया है।
अली के मुताबिक पहले लगा था कि बाजार सामान्य स्थिति में आ जाएगा और यह स्थिति अस्थाई है इसलिए रेस्टोरेंट में व्यंजनों के दामों में भी कोई वृद्धि नहीं की गई थी पर मूल्य तो तेजी से बढ़ते ही चले जा रहे हैं।
रेस्टोरेंट मालिकों के साथ एक और समस्या आव्रजन के नए कठोर नियमों की है जिनके कारण वे भारतीय उपमहाद्वीप के रसोइयों को यहाँ पर नहीं ला पा रहे हैं। ब्रिटेन में अप्रवासी रसोइयों की संख्या में इसलिए भी कमी आ गई है क्योंकि अवैध कर्मचारियों को पकड़ने के लिए रेस्टोरेंट्स पर छापे मारे जा रहे हैं। इस बात की आशंका है कि रसोइयों की कमी के चलते यहाँ के करीब 16000 भारतीय और चीनी रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ेगा।
ऐथेनिक माइनरिटी सिटीजन फोरम की अध्यक्ष मारिया फर्नांडिस ने चेतावनी दी है कि आव्रजन के नए नियमों के कारण वे सभी रेस्टोरेंट बंद हो जाएँगे जो अप्रवासी रसोइयों पर निर्भर करते हैं और इसके साथ ही विभिन्न समुदायों का अच्छा भोजन मिलने के लिए ब्रिटेन की जो पहचान बनी हुई है वह भी खत्म हो जाएगी।
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