जनमत सर्वेक्षणों में दिनोंदिन घटती अपनी लोकप्रियता से जूझ रहे प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन के लिए एक मई को होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे। ऐसी आशंका है कि उनकी लेबर पार्टी को चुनाव में सैकड़ों सीटों का नुकसान हो सकता है।
स्थानीय निकायों की चार हजार से ज्यादा सीटों पर चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब अर्थव्यवस्था ढलान पर है और पार्टी के भीतर ही ब्राउन के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। ऐसी आशंका है कि इंग्लैंड तथा वेल्स में लेबर पार्टी को 159 सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ये चुनाव ऐसे समय में भी हो रहे हैं जब मतदाताओं के बीच ब्राउन का समर्थन तेजी से कम हुआ है। यह किसी भी प्रधानमंत्री की संभवत: सबसे कम निजी रेटिंग बताई जा रही है।
लेबर पार्टी पर कंजरवेटिव की बढ़त में 16 फीसदी का इजाफा हुआ है जो 1997 में टोरी के सत्ता से बेदखल होने के बाद से सर्वाधिक है। बताया जाता है कि ब्राउन की निजी रेटिंग इस समय शून्य से 37 अंक नीचे है जो पिछले वर्ष अगस्त में 48 अंक पर थी। यह नेवेली चैम्बरलिन की रेटिंग से भी नीचे है जिसका सामना उन्हें 1940 में नार्वे पर जर्मन हमले के बाद करना पड़ा था।
लेबर पार्टी के भीतर भी ब्राउन को विपरीत हालात से जूझना पड़ रहा है। बताया जाता है कि पूर्व गृह मंत्री चार्ल्स क्लार्क दक्षिणी इंग्लैंड के सांसदों द्वारा ब्राउन के खिलाफ चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान की अगुवाई कर रहे हैं।
समझा जाता है कि इस हस्ताक्षर अभियान का मकसद क्लार्क द्वारा एक मई के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की स्थिति में ब्राउन के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाना है।
इस अभियान को राजनीतिक हलकों में ब्राउन के दस माह पुराने नेतृत्व को सर्वाधिक गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
लेबर पार्टी के सचेतकों ने पार्टी के सभी सांसदों को संदेश भेजा है कि वे मीडिया में आने वाले इन सर्वेक्षणों का जवाब न न दें कि संभावित नेतृत्व के चुनाव में वे किस उम्मीदवार को अपना वोट देंगे। पर्यवेक्षकों को इससे लेबर पार्टी में अराजकता की बू आ रही है।
एक मई को होने वाले चुनाव का मुख्य आकर्षण लंदन के मेयर पद का चुनाव होगा। इस पद के लिए मौजूदा मेयर केन लिविंगस्टोन तथा कंजरवेटिव बोरिस जोन्सन के बीच तगड़ा मुकाबला है।
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