ब्रिटिश सेना के जवानों ने दो साल के भीतर अफगानिस्तान में सात हजार तालिबान लड़ाकों को मार गिराया, लेकिन अब सेना इन हमलों में कमी लाने की योजना बना रही है क्योंकि आतंकवादियों के बड़ी संख्या में हताहत होने से उनके प्रति स्थानीय लोगों की लोकप्रियता में इजाफा होता है। 'संडे टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार 16 एयर एसॉल्ट के अर्द्धसैनिक बलों ने हेलमंद प्रांत में 2006 से अपनी पहली तैनाती के दौरान एक हजार तालिबानियों को मार गिराया।
इसके बाद ब्रिटिश सेना ने छह हजार से अधिक और तालिबान विद्रोहियों को मार गिराया। अर्द्धसैनिक बलों के कमांडरों का कहना है कि जब कुछ बागी मारे जाते हैं तो तालिबान लड़ाके स्थानीय लोगों और खास तौर से मरने वालों के परिजनों को भड़काते हैं, जिससे वह ब्रिटिश सेना के खिलाफ हथियार उठा लेते हैं।
इससे अप्रत्यक्ष रूप से तालिबान की ताकत बढ़ती है। उन्होंने कहा कि हम अपने हमलों में कमी लाने के साथ ही क्षेत्र में तालिबान का प्रभाव कम करने का प्रयास करेंगे ताकि बागियों की मौत और उसके बाद उसके परिजनों के ब्रिटिश सेना के खिलाफ हथियार उठाने का सिलसिला समाप्त हो सके।
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