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ब्रिटेन भी था एक बड़ा जुरासिक पार्क
शोधकर्ताओं का दावा है कि करीब 14 करोड़ साल पहले ब्रिटेन दुनिया के बड़े और विशुद्ध जुरासिक पार्कों मे से एक था।

1824 में डायनासोर की पहली प्रजाति की खोज के बाद शोधकर्ताओं ने अब तक 108 प्रजातियों की पहचान की है। उनका कहना है कि ब्रिटेन में अनेक किस्मों के वन्यजीवों के होने के कारण यह डायनासोर के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है।

इस अध्ययन के एक शोधकर्ता और पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय में कशेरुकी विज्ञानी डैरेन नैश ने कहा कि डायनासोर के लिए ब्रिटेन दुनिया के पहले पाँच स्थानों में से एक है। हमें यहां मध्यमस्तरीय जुरासिक के साथ लंबी गर्दन वाले डायनासोर की प्रजातियों के चिह्न मिले हैं।

तीन साल तक किए गए अध्ययन का प्रकाशन भूगर्भशास्त्रियों की एक पत्रिका में हुआ है। इसमें उल्लेख है कि डायनासोर की ब्रिटेन में हर ज्ञात प्रजाति 20 करोड़ साल पहले से साढ़े 6 करोड़ साल पहले तक रही है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि डायनासोर की अनेक प्रजातियों के बारे में उनके जीवाश्मों से भी पता चलता है। नैश के मुताबिक ब्रिटेन के लोगों को लंबे समय से दूसरे किसी भी स्थान से ज्यादा डायनासोर के जीवाश्म मिलते रहे हैं और यहाँ इनकी संख्या सर्वाधिक है।

1819 के बाद से विशेषज्ञों को स्काटिश द्वीपों से लेकर इंग्लैंड के दक्षिणी तटों तक खुदाई में डायनासोर के जबड़े की हड्डियाँ, अंडे के आवरण आदि मिलते रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की स्थानीय प्रजातियों में स्टेजोसोरस भी शामिल है, जिसके ऊपर स्पष्ट रूप से कवचनुमा परतें होती हैं। इसके अलावा परजीवभक्षी थेरोपोड्स और शाकाहारी सारोपोड्स भी इनमें शामिल हैं।

ब्रिटेन में कुछ डायनासोर समूहों के सबसे पुराने जीवाश्म मिल चुके हैं, लेकिन क्या पता चीन और अफ्रीका में भी अगले दशकों में और पुराने महत्वपूर्ण जीवाश्म मिल जाएँ।
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