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व्हाइट हाउस के लिए क्लिंटन की लड़ाई जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ और व्हाइट हाउस के लिए चुनाव लड़ने की अपनी उम्मीदों को बरकरार रखने के लिए हिलेरी क्लिंटन की लड़ाई जारी है।

अगले दस दिन उनके और बराक ओबामा के बीच जारी खींचतान के अंत का फैसला होगा।

पेंसिलवेनिया में 22 अप्रैल को होने वाली प्रक्रिया में अगर वे जीत नहीं पाती हैं तो राष्ट्रपति पद के लिए जून में तय होने वाली उम्मीदवारी की उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा और ओबामा को हराने के लिए लंबे समय से जारी उनके प्रयास भी थम जाएँगे।

ओबामा की कामकाजी मतदाताओं को 'कटु' कहने की एक बड़ी भूल क्लिंटन को इस दौड़ में रफ्तार दे सकती है, जिसकी उन्हें जरूरत भी है। उन्होंने कल इस मुद्दे को उठाया था और कहा था कि उनके प्रतिद्वंद्वी अमेरिकी मतदाताओं के एक बड़े समूह को नीचा दिखा रहे हैं।

इंडियाना में हुई रैली में उन्होंने कहा सीनेटर ओबामा की टिप्पणी अभिजात वर्ग से जुड़ी है। यह अमेरिकी मूल्यों और मान्यताओं को नहीं दर्शाती है।

छह सप्ताह तक चली लड़ाई के बाद फिलाडेल्फिया में बुधवार की रात एक चर्चा के दौरान क्लिंटन और ओबामा आमने-सामने होंगे। उम्मीदवारी के लिए मिली जीत के मामले में क्लिंटन ओबामा से पीछे हैं।

प्रिंस्टन विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर और चुनाव विश्लेषक जुलियन जेलिजर ने कहा कि माना जा रहा है कि यह महत्वपूर्ण समय है जिससे यह तय होगा कि वे दौड़ में शामिल रह सकेंगी या नहीं।

उन्होंने कहा यह भी माना जा रहा है कि उन्हें अपनी लड़ाई जारी रखने का अधिकार है और उनके जीतने की उम्मीदें भी हैं। इस बीच क्लिंटन को सुपर डेलिगेट्‍स पर भी निशाना साधना होगा, जिनके बारे में उन्होंने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। ये पार्टी के शीर्ष नेता हैं जो उम्मीदवारी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
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