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नेपाल में माओवादियों का वर्चस्व
नेपाल में संविधान सभा के चुनाव के शुरुआती नतीजे चौंकाने वाले हैं। ज्यादातर सीटों पर माओवादी उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री सूर्य बहादुर थापा धनकुटा सीट से चुनाव हार गए हैं। वह महज 5332 मत पाकर मुकाबले में तीसरे स्थान पर फिसल गए। इस सीट के लिए चुने गए माओवादी प्रत्याशी हरिराज लिम्बू ने उन्हें 12 हजार 99 मतों से हराया।

माओवादी मुखिया प्रचंड काठमांडू 10 पर और माओवादियों के दूसरे नम्बर के नेता डॉ. बाबूराम भट्टाराई गोरखा अपने निकटतम प्रतिद्वंदियों से भारी बढ़त बनाए हुए हैं।

नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार चक्र बहादुर ठाकुरी और सुप्रभा घिमिरे ने क्रमशः काठमांडू की सीट संख्या 3 और 4 जीत ली हैं।

यूनाइटेड माओवादी लेनिनवादी (यूएमएल) महासचिव माधव कुमार नेपाल काठमांडू 2 सीट पर दूसरे स्थान पर चल रहे हैं। इस सीट पर माओवादी उम्मीदवार झक्कू सुबेदी 2000 मतों से बढ़त बनाए हुए हैं।

माओवादी प्रत्याशी 58 सीटों पर आगे चल रहे हैं, जबकि नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार 23 स्थानों पर। यूएमएल के प्रत्याशी 15 सीटों पर, मधेसी पीपुल्स राइट्स फोरम 7 सीटों पर तथा तराई मधेस डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।

कभी विद्रोही कहे जाने वाले माओवादियों की संविधान सभा के चुनाव में बढ़त पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए एक एशियाई राजनयिक ने कहा कि ऐसे चुनाव नतीजों और रुझानों का अन्दाजा खुद माओवादियों को भी नहीं होगा। उनके उम्मीदवारों ने ऐसे क्षेत्रों में भी चुनाव जीता है, जहाँ उनकी ज्यादा पकड़ नहीं है।

नेपाल में नौ साल के बाद हुए चुनाव के पूरे अंतिम नतीजे आने में 10 दिन का समय लगने की संभावना है।

कम्युनिस्ट यूएमएल पार्टी के एक कार्यकर्ता के अनुसार नेपाल के लोग माओवादियों को भी एक मौका देना चाहते हैं। हालाँकि राजनीतिक विश्लेषक और राजनयिकों का कहना है कि माओवादियों के स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बारे में दावे से कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी।

गौरतलब है कि नेपाल में 601 सदस्यीय संविधान सभा के चुनाव के लिए गत गुरुवार को मतदान हुआ था।
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