रूस ने अंतरिक्ष में भेजी गई पहली कुतिया लेका के नाम पर एक स्मारक खोला है। पचास साल पहले लेका की अंतरिक्ष सैर ने अंतत: मानव के वहाँ कदम रखने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।
मास्को में एक सैन्य अनुसंधान के पास उस जगह यह स्मारक बनाया गया है, जहाँ तीन नवम्बर 1957 को उसकी उड़ान से पहले की तैयारियाँ हुई थीं। स्मारक में एक रॉकेट के ऊपर खड़ा एक कुत्ता दिखाया गया है।
सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत भेजे गए सभी कुत्ते संकर वर्ण के थे, इसलिए कि वे दुष्कर परिस्थितियों को सहन कर सकें। एक विशेषता यह थी कि वे सभी छोटे कद के थे, इसलिए कि रॉकेट में उन्हें रखा जा सके।
उपग्रह को एक माह से भी कम समय में तैयार किया गया और उसके प्रक्षेपण से महज नौ दिन पहले दो वर्षीय लेका को अंतरिक्ष में भेजे जाने के लिए चुना गया। इससे पहले चार अक्टूबर 1957 को सोवियत संघ ने दुनिया का पहला उपग्रह कक्षा में स्थापित किया था।
तकनीकी खामी से प्रक्षेपण में विलंब के कारण लेका को तीन दिन तक केबिन में रहना पड़ा, लेकिन कक्षा में पहुँचने पर उसका तापमान और रक्तचाप सामान्य था और उसने तैयार भोजन किया। बाद में उसकी मौत हो गई।
विफल प्रक्षेपणों में कई अन्य कुत्तों की जान भी गई। साठ के दशक में लेकिन बेल्का और स्ट्रेल्का नामक कुत्ते अंतरिक्ष से सुरक्षित धरती पर लौट आए।
कुत्तों को लेकर कुछ अन्य उड़ानों के बाद सोवियत संघ ने अंतत: 12 अप्रैल 1961 को यूरी गारगिन को अंतरिक्ष में भेजकर मानव सहित अंतरिक्ष यात्रा का कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया।
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