साँस की बदबू बहुत आम परेशानी है। आमतौर पर यह कहा जाता है कि पेट की खराबी के कारण यह होती है। हाल में डलास में अमेरिकन एसोसिएशन फॉर डेंटल रिसर्च ने यह पता लगाया है कि इसके पीछे सोलोबैक्टेरियम मूरी का हाथ है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि सोलोबैक्टेरियम मूरी ऐसा अवयव है, जो साँस में बदबू भर देता है। जिव्हा पर कई बार सल्फर के अवयव जमा होते हैं और ये दूसरे बैक्टेरिया के साथ मिलकर बदबू फैलाते हैं। जिव्हा के बैक्टेरिया फैटी एसिड और दुर्गंध वाले अवयव तैयार करते हैं। 80 से 90 प्रश मामलों में बदबू का कारण यही बनता है। बफॅलो स्कूल ऑफ डेंटल मेडिसिन के छात्र बेस्टी क्लार्क ने बताया कि कुछ मामलों में फेफड़ों और कुछ मामलों में साइनस के कारण दुर्गंध आती है।
अध्ययन में बदबू वाले 21 लोगों को शामिल किया गया, जबकि 36 लोग सामान्य थे। क्लार्क व उनके साथियों ने एस मूरी नाम के अवयव को हर व्यक्ति में पाया। इसमें हेलिटोसिस संक्रमण होता है। 4 लोगों में हेलिटोसिस के बिना एस मूरी मिला। यह पीरियडोन्टिस होता है। यह एक तरह की मसूड़े की तकलीफ कही जाती है, जिससे साँसों में बदबू आती है।
पहले के अध्ययन में आठ लोगों को शामिल किया था। इसके मुताबिक आठ लोग हेलिटोसिस वाले थे और पाँच उसके बिना। एस मूरी सभी मरीजों में पाया गया। कई अन्य अध्ययन कहते हैं कि हेलिटोसिस वाले लोगों में भी एस मूरी रहता है। अभी तक यह कहा जाता रहा है कि दिन में दो बार ब्रश करने से और जिव्हा साफ करने से साँस की बदबू के बैक्टीरिया नहीं रहते, लेकिन अब नई जानकारी के बाद नई धारणा बनेगी। (नईदुनिया)
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