तिब्बत में हिंसा भड़कने के बाद दलाई लामा ने अपनी पहली विदेश यात्रा शुरू करते हुए यहाँ बीजिंग ओलिंपिक का समर्थन किया।
इसके साथ ही तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता ने चीन से अपील की कि उन्हें दानव करार नहीं दिया जाए। दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से तिब्बती समुदाय से अनुरोध किया था कि वे सेन फ्रांसिस्को में ओलिंपिक मशाल का सम्मान करें। वहाँ भारी सुरक्षा के कारण लंदन और पेरिस जैसी घटनाओं को टाला जा सका। वे अमेरिका जाने के क्रम में कुछ समय के लिए जापान में रुके थे और संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने एक समय मजाकिया लहजे में दानव की शक्ल में अपने सिर पर अँगुलियाँ रख लीं। दलाई लामा ने कहा कि मुझे इस बात से दु:ख होता है कि वहाँ की सरकार हमेशा मुझे दानव ठहराती है। मैं सिर्फ इनसान हूँ, दानव नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसा जताने का प्रयास कर रहे हैं कि हम लोग चीन विरोधी हैं। अत: मैं पूरी दुनिया में खासकर मुख्य भूमि में चीनी भाइयों और बहनों से अपील करता हूँ कि हम लोग चीन विरोधी नहीं हैं।
चीन ने नोबल पुरस्कार विजेता पर तिब्बत में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। दलाई लामा ने आज फिर दोहराया कि वे तिब्बत की स्वायत्तता और चीन के अंदर सांस्कृतिक आजादी की माँग करते हैं।
इसके साथ ही वह ओलिंपिक आयोजित करने के चीन के अधिकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि हम चीन में विश्व खेलों के आयोजन का स्वागत करते हैं, क्योंकि चीन सबसे अधिक आबादी वाला और प्राचीनतम राष्ट्र है।
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