हालाँकि लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरण श्रीलंकाई सेना के साथ लड़ रहा है, लेकिन इसके वाबजूद उसके द्वारा छोड़े गए घर को सरकार ने किसी भी संभावित तोड़-फोड़ की दृष्टि से महफूज रखा हुआ है।
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि प्रभाकरण का निवास उसके गृह नगर वेलवेत्तिथुरई में है और यह उसके सीमा क्षेत्र में नहीं आता है। एक सवाल के जवाब में सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि उसका घर न तो बहुत छोटा है और न ही हवेलीनुमा है। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार के घर की तरह दिखाई देता हैं।
प्रभाकरन का जन्म 26 जनवरी 1954 को हुआ था और वह अपने परिवार के चार बच्चों में सबसे छोटा था। लिट्टे के इस प्रमुख ने युवा उम्र में ही परिवार छोड़ दिया था और पृथक तमिल राज्य की लड़ाई शुरू कर दी थी। अधिकारी के मुताबिक प्रभाकरन के रिश्तेदार अब भी वेलवेत्तिथुरई में रहते हैं लेकिन किसी गतिविधि में भाग लेते दिखाई नहीं देते।
यह पूछने पर कि क्या प्रभाकरण सताए गए लोगों के परिजनों ने कहीं उसके घर को नुकसान पहुँचाने की कोशिश तो नहीं की, इस पर अधिकारी का कहना था कि उसके घर को महफूज रखने के लिए ऐहतिहात भरे कदम उठाए गए हैं।
प्रभाकरण ने पिछले माह श्रीलंका की सरकार पर देश में तमिल इतिहास के साक्ष्य मिटार्नें का आरोप लगाया था और कहा था कि रिकॉर्ड को बचाए रखने का कर्तव्य लेखकों और साहित्यकारों का है। उसने कहा था कि श्रीलंका के सुरक्षा बलों ने तमिल लोगों की संपत्ति को बमबारी के जरिए नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है।
एक किताब के मुताबिक तमिल नेता वर्तमान में पूर्वोत्तर श्रीलंका के घने जंगलों में जमीन से 40 फुट नीचे एक बड़े और सुविधायुक्त बंकर में रहता है। एक और रिपोर्ट यह कहती है कि सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बंकर के अंदर किसी को भी सशस्त्र जाने की इजाजत नहीं है।
अधिकारी ने कहा कि वेलवेत्तिथुरई में कोई समस्या नहीं है। लोग रोजाना अपने काम पर जाते हैं। यहाँ हर समय अभियानों की बारीकी से जाँच नहीं की जाती हैं।
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