पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं क्योंकि नई गठबंधन सरकार एक संवैधानिक पैकेज तैयार कर रही है, जिसके तहत मुशर्रफ की महत्वपूर्ण शक्तियाँ कम हो जाएँगी और वह नाममात्र के प्रमुख रह जाएँगे।
नेशनल असेंबली के अगले सत्र के दौरान पैकेज को पेश किया जाएगा। इसके तहत मुशर्रफ की कई शक्तियों में कटौती हो जाएगी। इनमें नेशनल असेंबली को भंग करने और देश में आपातकाल लागू करने का अधिकार शामिल हैं। शक्तियाँ कम होने से मुशर्रफ नाममात्र के राष्ट्र प्रमुख रह जाएँगे।
सरकार ने मुशर्रफ की अनदेखी शुरू कर दी है, जो नौ साल तक सख्ती के साथ शासन करते रहे हैं। सरकार की ओर से मंत्रियों के उनसे मिलने पर अघोषित प्रतिबंध है। हालाँकि मुशर्रफ के सहयोगियों का कहना है कि 18 फरवरी को संपन्न चुनावों के बाद पृष्ठभूमि में हो जाने की उनकी अपनी रणनीति थी।
दैनिक अखबार डान ने सूत्रों के हवाले से बताया कि संविधान के अनुच्छेद 58 (2-बी) के तहत नेशनल असेंबली को भंग करने के राष्ट्रपति के अधिकार के अलावा प्रांतीय राज्यपालों व सशस्त्र बलों के प्रमुखों को नियुक्त करने किसी भी प्रांत में केंद्रीय शासन लागू करने या देश में आपातकाल की घोषणा करने की शक्तियों को वापस ले लिया जाएगा।
सूत्रों ने कहा कि संसद के दोनों सदनों से संविधान का 18वाँ संशोधन पारित हो जाने के बाद राष्ट्रपति की शक्तियाँ कम हो जाएँगी और वह नाममात्र के राष्ट्राध्यक्ष रह जाएँगे।
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