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ब्रिटिश सैनिक पढ़ रहे हैं महाभारत का पाठ
ब्रिटिश सेना में हिन्दू धर्म के पहले पुरोहित कृष्ण अत्री अफगानिस्तान और इराक जाने वाले सैनिकों को महाभारत का पाठ पढ़ाने के काम में लगे हैं। वह युद्धग्रस्त देशों में जाने वाले ब्रिटिश सैनिकों को उपदेश दे रहे हैं कि किस तरह युद्ध उनका कर्म है।

अत्री उन प्रथम चार धर्म पुरोहितों में से एक हैं, जिन्हें ब्रिटिश सेना ने 2005 में नियुक्त किया था। अन्य तीन धर्म पुरोहितों में मंदीप कौर (सिख), सुनील कारियाकरवाना (बौद्ध) और इमाम असीम हाफिज (इस्लाम) धर्म से संबंधित हैं।

ब्रिटेन के सशस्त्र बलों में ईसाई धर्म के 300 नियमित कमीशन प्राप्त धर्म पुरोहित कार्यरत हैं, जो एक लाख 83 हजार ईसाई सैन्यकर्मियों की सेवा में लगे हैं, लेकिन चार अन्य धर्मों के पुरोहितों की नियुक्ति ब्रिटिश सेना के इतिहास में पहली बार हुई है।

अत्री हिमाचल प्रदेश के कसौली के रहने वाले हैं। वह ब्रिटिश सेना के इराक और अफगानिस्तान जाने वाले हिन्दू सैनिकों को युद्ध की आवश्यकता के बारे में समझाने के लिए भगवद्‍ गीता के उदाहरणों का इस्तेमाल करते हैं। ब्रिटेन की सेना में 470 हिन्दू सैनिक शामिल हैं।

अत्री का कहना है मैं उन्हें बताता हूँ कि भगवान ने उन्हें अपने देश और विश्व शांति के लिए एक अवसर प्रदान किया है। उन्हें यह जानने की जरूरत है कि वे किसी को सिर्फ ड्यूटी पूरी करने के लिए नहीं मार रहे हैं।

'द टाइम्स' के अनुसार नौकरी के लिए ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय में जब अत्री का साक्षात्कार हुआ तो उनसे पूछा गया कि यदि कोई सैनिक युद्ध में न जाना चाहे तो वह उससे क्या कहेंगे? अत्री ने कहा ड्यूटी हमारी प्राथमिकता है, यह हमारा कर्म है और हमें इसका सामना करना ही पड़ेगा।

उन्होंने अखबार से कहा कि सैनिक जानते हैं कि उन्हें देश की सीमाओं से बाहर देखने का एक मौका मिला है। अत्री शादी कराने सैनिकों और उनके परिवारों की मदद करने तथा हिन्दू सैनिकों और उनके कमांडरों के बीच सहयोगी के रूप में काम करने जैसी भूमिका भी निभाते हैं।

ब्रिटिश सेना अत्री को काफी व्यस्त रखती है। वह गोरखा सैनिकों के लिए धर्म पुरोहित का चयन करने के लिए नेपाल भी जा चुके हैं। इस बार वह सैनिकों से मिलने अफगानिस्तान जाएँगे।

अत्री 1986 में 22 साल के एक संत के रूप में ब्रिटेन के न्यूकैसल स्थित मंदिर आए थे। वह लगभग दो दशक तक मँदिर में ही रहे और वहाँ हिन्दू धर्म संगीत तथा भारतीय भाषाएँ सिखाने का काम करते रहे।
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