पाकिस्तान की नई सरकार ने शनिवार को साफ किया कि कश्मीर मुद्दे पर देश के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और यह ऐतिहासिक नजरिये से ही इसका समाधान करना चाहता है।
विदेशमंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान कश्मीर और पाकिस्तान के लोगों की इच्छा के मुताबिक होना चाहिए।
पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए तीसरे पक्ष को शामिल करने पर जोर देता रहा है, लेकिन भारत इस माँग को खारिज करते हुए इसके द्विपक्षीय हल पर जोर देता रहा है। लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष ने हाल में कहा था कि दोनों देशों के बीच संबंध कश्मीर मुद्दे पर ही नहीं अटकने चाहिए। इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए छोड़ देना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि देश की कश्मीर नीति को काफी विचार विमर्श के बाद बनाया गया था और सरकार की इच्छा है कि इस काफी समय से लंबित पड़े इस मुद्दे का समाधान हमारे ऐतिहासिक नजरिये के अनुसार किया जाए।
कुरैशी ने कहा कि विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी को पाकिस्तान आमंत्रित किया गया है और उनकी यात्रा की तारीख निश्चित की जा रही है। मुखर्जी की यात्रा से पहले विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भी चौथे दौर की समग्र वार्ता की समीक्षा के लिए पाकिस्तान की यात्रा करेंगे।
दोनों पक्षों ने पिछले साल अगस्त में चौथे दौर की समग्र वार्ता में आठ मुद्दों पर बातचीत पूरी की थी। हालाँकि पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल के चलते चौथे दौर की वार्ता को पूरा करने और पाँचवें दौर की शुरू करने के लिए विदेशमंत्री स्तर की बातचीत नहीं हो सकी थी।
कुरैशी ने कहा कि भारत के साथ समग्र वार्ता प्रक्रिया को शीघ्रातिशीघ्र शुरू किया जाना चाहिए क्योंकि यह दोनों देशों के हित में है।
पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की मजार की यात्रा के दौरान कुरैशी ने इन नतीजों (चौथे दौर की बातचीत के दौरान) को ध्यान में रखते हुए हम अगले दौर की बातचीत का आधार तैयार करेंगे।
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