अफगानिस्तान सरकार ने युद्ध से जर्जर अपने देश में निजी टीवी स्टेशनों को चर्चित भारतीय धारवाहिकों के प्रसारण पर 15 अप्रैल से रोक लगाने को कहा है। यह कदम कट्टरवादियों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने धारावाहिकों को गैर इस्लामी करार देकर इनकी आलोचना की है।
अफगानिस्तान के संस्कृति और सूचना मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला सांसदों और धार्मिक नेताओं की बैठक के बाद लिया गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने कहा है कि इन कार्यक्रमों के खिलाफ ढेर सारी शिकायतें मिली हैं।
अफगानिस्तान में छह भारतीय धारावाहिकों का प्रसारण किया जा रहा है और इससे टीवी चैनलों को काफी राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन कट्टरवादियों ने इन्हें गैर इस्लामी करार देते हुए इसकी आलोचना की है।
अफगानिस्तान के टोलो एरियाना और शमशाद सहित कई निजी टीवी चैनल भारतीय धारावाहिकों का पश्तो और फारसी में रूपांतरण कर प्रसारण करते हैं।
अफगानिस्तान में प्रसारित किया गया पहला भारतीय धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' था। इसे टोलो चैनल ने वर्ष 2005 में शुरू किया था। अफगानिस्तान में 'कहानी घर-घर की' और 'कसौटी जिंदगी की' का भी प्रसारण किया जाता है।
अफगानिस्तान के संस्कृति और सूचना मंत्री अब्दुल करीम खुर्रम ने कहा कि जो टीवी चैनल 15 अप्रैल से भारतीय धारावाहिकों का प्रसारण बंद नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अफगानिस्तान की संसद ने नृत्य जैसे अन्य गैर इस्लामी तौर-तरीकों को दिखाने वाले टीवी कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने के लिए हाल ही में एक प्रस्ताव पारित किया था।
अफगानिस्तान सरकार ने यह फैसला टोलो चैनल पर एक फिल्म पुरस्कार समारोह दिखाए जाने के बाद किया, जिसमें पुरुष और महिलाओं को नृत्य करते हुए दिखाया था।
अफगानिस्तान के चैनलों द्वारा भारतीय धारावाहिकों में दिखाए जाने वाले हिंदू देवताओं और नायिकाओं के खुले गले व बाहों के दृश्यों को कई बार धुँधला कर दिया जाता है।
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