बचपन में आलसी और सुस्त जीवनशैली अपनाने वाले किशोरवय बच्चों में वयस्क होने पर अपने अन्य हमउम्रों के मुकाबले दिल की बीमारियाँ होने की आशंका छह गुना बढ़ जाती है। इस संबंध में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। इतना ही नहीं वयस्क होने पर दिल की बीमारी की चपेट में आने के कई सारे लक्षण भी किशोरावस्था में ही नजर आने लगते हैं, जिन्हें मैटाबोलिक सिंड्रोम कहा जाता है। राबर्ट मैकुरे की अगुवाई में यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं के एक दल ने सात से दस वर्ष आयु समूह के करीब 400 बच्चों पर वजन, चर्बी का प्रतिशत, रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रोल स्तर समेत विभिन्न बातों का अध्ययन किया। इस अध्ययन में शारीरिक कसरत की अवधि और उसकी संख्या को भी मापा गया। सात साल बाद मैटाबोलिक सिंड्रोम का पता लगाने के लिए इन्हीं बच्चों का फिर से अध्ययन किया गया।
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