पिछले दिनों ब्रिटेन में भारतीय रेस्तराँ में भोजन का लुत्फ उठा रहे ब्रिटिश नागरिकों को आव्रजन अधिकारियों द्वारा की गई कटु पूछताछ का सामना करना पड़ा, जो अवैध कामगारों की तलाश में छापेमारी कर रहे थे।
अधिकारियों की इस कार्रवाई का सांसदों तथा अन्य समुदायों ने कड़ा विरोध किया है। जनवरी में नए आव्रजन नियम लागू होने के बाद से अधिकारियों के छापे की कई खबरें मिली हैं। कई मामलों में गैरकानूनी ढंग से काम कर रहे खानसामों और अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
दक्ष खानसामों की कमी के कारण ब्रिटेन में भारतीय रेस्तराँ उद्योग संकट से गुजर रहा है। नए आव्रजन नियमों के कारण वह भारतीय उपमहाद्वीप से भर्ती भी नहीं कर पा रहा है।
इन छापों से स्थिति और बदतर हो गई है। इस कारण स्काटलैंड और दूसरी जगह विरोध के स्वर उठने लगे हैं। हाल ही में ऐसे दो छापे योर्क के द गेट ऑफ इंडिया तथा तंदूरी नाइट्स में मारे गए।
योर्क से मिली खबर में कहा गया है कि छापों के दौरान दोनों रेस्तराँओं से चार संदिग्ध गैरकानूनी आव्रजक कर्मचारी पकड़े गए। दोनों रेस्तराँओं के खिलाफ मामला बन सकता है।
सरकार ने पिछले साल के अंत में ऐलान किया था कि अवैध रूप से काम करने वाले को गिरफ्तार तो किया ही जाएगा, साथ ही उस व्यवसाय के ऊपर भी हजारों पाउंड का जुर्माना ठोंका जाएगा।
गोवा के मूल निवासी लेबर पार्टी के सांसद कीथ वाज ने इस पर प्रतिक्रिया करते हुए दक्षिण एशियाई रेस्तराँओं पर छापे बंद करने की माँग की है।
प्रतिनिधि सभा की चयन समिति के अध्यक्ष वाज ने कहा कि छापों का ब्रिटेन के कैटरिंग उद्योग पर घातक असर पड़ा है और यूरोप की व्यंजन राजधानी कहलाने वाले देश के इस दर्जे को इससे खतरा पैदा हो गया है।
वाज और अन्य सांसदों को कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि आव्रजन अधिकारी दक्षिण एशियाई रेस्तराँओं को निशाना बना रहे हैं। कई बार व्यस्ततम घंटों में नाटकीय रूप से उनका प्रवेश होता है जिससे ग्राहकों को बीच में बिना बिल चुकाए खाना छोड़कर जाना पड़ता है और रेस्तराँ बंद हो जाते हैं। वाज ने कहा कि अवैध रूप से काम करने के बहुत कम साक्ष्य हैं। इन पर (छापों) तुरंत रोक लगनी चाहिए। बजाय छापा मारने के मालिकों से बातचीत कर गैरकानूनी रूप से काम करने की समस्या के हल का रास्ता निकालना चाहिए। इसी हफ्ते एथनिक सिटीजंस फोरम की अध्यक्ष मेरिकया फर्नांडीस को वर्क परमिट से संबंधित नियमों में किए गए बदलाव से उत्पन्न चिंता से 350 से अधिक भारतीय, बांग्लादेशी तथा चीनी रेस्तराँओं के प्रतिनिधियों अवगत कराया।
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