अकूत तेल संपदा के मालिक अरब देशों में भी आम जनता इन दिनों जबरदस्त महँगाई की मार झेल रही है।
सऊदी अरब से लेकर मिस्र और यमन से लेकर कतर में मुद्रास्फीति की दर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और खाने पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आई मंदी के कारण पेट्रो डॉलर की चमक भी फीकी पड़ गई है। बार-बार बढ़ती मुद्रास्फीति की दर के कारण अरब देशों की सरकारों ने आवश्यक चीजों पर आयात शुल्क में भारी कमी कर दी है, लेकिन फिलहाल इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है।
रोम स्थित वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के प्रवक्ता रोबिन लोज ने बताया कि पश्चिम एशिया में खाद्यान्न संकट पहले से ही है। एक ओर सऊदी अरब जैसे देश तेल बेचकर अमीर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन, इराक, सीरिया और लेबनान में खाद्यान्न संकट बढ़ता जा रहा है।
सऊदी अरब सरकार ने इस साल जनवरी से सरकारी कर्मचारियों के वेतन में पाँच प्रतिशत की वृद्धि की है, जबकि इस देश में मुद्रास्फीति की दर 8.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
यू एन फूड प्रोग्राम के लिए पश्चिम एशिया में अपना खाद्य कार्यक्रम चलाना मुश्किल हो रहा है। एजेंसी का कहना है कि खाने-पीने की चीजों के दामों में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है ऐसे खाद्य कार्यक्रम कैसे चलाया जाए। सीरिया में भी जरूरी चीजों के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
लेबनान के नोट्रे डोम विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर होबिका इसे वैश्विक समस्या बताते हैं। उनका मानना है कि विकसित देशों में माँग बढ़ने और खाद्यान्नों का उत्पादन घटने से ये नौबत आई है। बाकी कसर वे विकसित देश पूरी कर रहे हैं जो अनाजों से बायोडीजल बना रहे हैं।
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