ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोगों सहित लगभग आधे जातीय अल्पसंख्यकों को नस्लवाद का सामना करना पड़ता है और इसी वजह से इन लोगों के मन में ब्रिटेनवासी होने की सोच घट जाती है।
जोसेफ रोंट्री फाउंडेशन द्वारा तैयार 'आव्रजन विश्वास और लगाव' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग आधे जातीय अल्पसंख्यक ब्रिटेन में जातीय भेदभाव की समस्या का सामना कर चुके हैं। तीस प्रतिशत मुस्लिम आव्रजकों ने कहा कि उन्हें धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
यह रिपोर्ट 2006 और 2007 के दौरान किए गए 319 साक्षात्कारों पर आधारित है। फाउंडेशन ने ब्रिटेन के तीन नगरीय इलाकों में रहने वाले 40 देशों के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से बात की। साक्षात्कार में अधिकतर आव्रजकों ने कहा कि वे ब्रिटेन और अपने मूल देश दोनों से ही अपना जुड़ाव मानते हैं और इसे लेकर उनके मन में कोई द्वंद्व नहीं है।
ब्रिटेन से बाहर जन्मे और लंबे समय से इस देश में रह रहे 60 प्रतिशत मुसलमानों ने कहा कि उनके लिए ब्रिटेन में रहने वाले लोग अधिक महत्वपूर्ण हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से संबंध रखने वाली रिपोर्ट की सह लेखक हिरंती जयवीरा ने कहा कि साक्ष्यों से पता चलता है कि जातीय अल्पसंख्यक भेदभाव और नापसंदगी का सामना कर रहे हैं और इसी वजह से इन लोगों के मन में ब्रिटेनवासी होने की सोच घट जाती हैं।
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