कहने को तो वे नशे की खेती करते हैं और होना उन्हें सबसे अमीर था, लेकिन हुआ उल्टा। कर्ज में डूबे अफगानी किसान साहूकारों से छिपते फिरते हैं और शर्मनाक सौदे करने को मजबूर हैं।
कहानी खालिदा और उसके पिता सैयद पठान की है। सैयद के यहाँ 10 बच्चे हैं। अफीम की खेती ही सैयद करते आया है। वह पिछड़ा और अशिक्षित किसान है। यहाँ तक कि उसे यह भी नहीं मालूम कि कौनसा बच्चा कब पैदा हुआ।
माना कि यह नकदी फसल है, लेकिन फिर भी सैयद जैसे कई किसान भूखों मरने की नौबत में हैं। बिचौलिए जो फसल को इधर-उधर तस्करों के हवाले करते हैं, वे खूब धन कूट रहे हैं, जबकि ये किसान गुरबत में पल रहे हैं। लघमन प्रांत में रहने वाले सैयद की हालत तब और खराब हो गई, जब सैयद ने एक स्थानीय तस्कर से करीब 2000 डॉलर (80,000 रु. के लगभग) सूद पर लिए। उसने यह वादा किया कि वह कर्ज को 24 किलो अफीम के साथ चुका देगा। सैयद के पास करीब 2.5 एकड़ जमीन है और वह फसल के बाद कर्ज नहीं चुका सका।
जिल्लत से बचने के लिए उसने अपने परिवार को जलालाबाद भगा दिया, परंतु तस्करों ने ढूँढ निकाला और अफीम की माँग की। सैयद ने मामला यहाँ की आदिवासी परिषद में पेश किया, परंतु न्याय कुछ और ही हुआ। यह तय किया गया कि सैयद को अपनी बेटी की शादी उस तस्कर से कराना पड़ेगी। खालिदा की मन से इच्छा थी कि वह कभी शिक्षिका बने, परंतु अब यह असंभव होगा।
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