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'मे आई हेल्प यू...'
हो सकता है कि आने वाले दिनों में यदि आप राजधानी जाएँ तो टैक्सी चालक आपसे कहे- 'व्हेअर डू यू वॉन्ट टू गो' (आप कहाँ जाना चाहते हैं), तभी दूसरा आए और कहे- 'सर यू वॉन्ट टू सी साइट सीन्स' (क्या आप दिल्ली के आकर्षक नजारे देखना चाहते हैं। यह हकीकत जल्द ही राजधानी में नजर आएगी।

दुनिया की दो तेजी से दौ़ड़ती अर्थव्यवस्थाएँ भारत और चीन अपने यहाँ लोगों को तैयार करने में लगी हैं। चीन में ओलिंपिक के लिहाज से लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जबकि भारत में राष्ट्रकुल खेल 2010 के लिए तैयार किया जा रहा है।

मकसद है आने वाले मेहमानों को परेशानी न हो। दिल्ली में इसी को सोचकर टैक्सी ड्राइवर, वेटर और सुरक्षा वालों को अंतरराष्ट्रीय भाषा अँगरेजी सिखाई जा रही है।

दिल्ली सरकार ने इसका खास ख्याल रखा है। पर्यटन विभाग के साथ मिलकर यह भी सिखाया जा रहा है कि बाहर से आने वालों से किस तमीज से पेश आए। दोनों ने मिलकर क्षमता उन्नयन कार्यक्रम चला रखा है। यह उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है, जो पर्यटकों के सीधे संपर्क में आते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अभी तक करीब 2,000 टैक्सी ड्राइवरों को अँगरेजी सिखाई गई है। दरबान, सुरक्षाकर्मी और वेटरों को यह भी सिखाया जाएगा कि किस तरह से मेहमानों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए और कितनी विनम्रता से बात करना है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि शहर का हर टैक्सी ड्राइवर यह प्रशिक्षण ले सके।

अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक प्रतिसाद काफी अच्छा है। अप्रैल से हर माह करीब 1,000 लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। मार्च 2009 तक सभी होटल, टूर ऑपरेटर और ट्रेवल एजेंट को सब कुछ सिखा दिया जाएगा। यह सही है कि राष्ट्रकुल खेल दिल्ली में होंगे, परंतु उत्तरप्रदेश के आगरा, मथुरा, मध्यप्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, बिहार के गया और उड़ीसा के पुरी में भी पर्यटक जाएँगे। इसलिए यह कोशिश है कि यहाँ के लोगों को भी सिखाया जाए।

आधिकारिक अनुमान के अनुसार 2010 में दिल्ली में होने वाले खेल में करीब 20 लाख विदेशी पर्यटक आएँगे। भारत के करीब 35 लाख पर्यटक जमा होंगे। दिल्ली में करीब 20,000 टैक्सी चालक हैं। इनमें से 1,500 रेडियो कैब के हैं। इनमें से अधिकांश कक्षा 10वीं से आगे नहीं पढ़े हैं।

चूँकि इनको एकसाथ प्रशिक्षित नहीं किया जा सकता, इसलिए एक योजना के तहत इनको पूरी तरह से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कुछ ड्राइवर अपने मन से भी अँगरेजी सीख रहे हैं। उनका मानना है कि उन्हें सरकार पर निर्भर नहीं रहना है।
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