भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक को जलवायु परिवर्तन एवं मौसम संबंधी भविष्यवाणी से संबंधित विषय पर अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय मौसम संगठन (आईएमओ) के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है।
जॉर्ज मैसन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. जगदीश शुक्ला को संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) की कार्यकारी परिषद ने मौसम क्षेत्र में अनुसंधान के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया।
पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में किया गया। शुक्ला को डब्ल्यूएमओ के अध्यक्ष डॉ. एलेक्जेंडर बेडरिस्की ने पुरस्कार दिया। समारोह को अमेरिका में भारत के राजदूत रोनेन सेन ने भी संबोधित किया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल के संदेश में घोषणा की गई कि भारत सरकार ने शुक्ला को मौसम और जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सलाहकार समिति का अध्यक्ष मनोनीत करने का फैसला किया है।
सिब्बल ने कहा कि शुक्ला की सेवाओं को भारत में जलवायु परिवर्तन से संबंधित अनुसंधान पर विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस अवसर पर शुक्ला ने उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के दूरदराज के गाँव मिरधा से शुरू हुई अपनी यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव से शुरू हुई यात्रा ने धीरे-धीरे उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
शुक्ला ने कहा कि आज भी उनका अपनी मातृभूमि से गहरा संबंध बना हुआ है और वह साल में कई बार वहाँ जाते हैं। शुक्ला ने पीएचडी की उपाधि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से हासिल की थी।
आईएमओ पुरस्कार मौसम क्षेत्र में उल्लेखनीय काम के लिए हर साल दिया जाता है और इसे इस क्षेत्र का सर्वोच्च पुरस्कार माना जाता है।
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