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तिब्बती भिक्षुओं को सजा नहीं
निर्वासित नेता दलाई लामा के पक्ष में नारेबाजी करके सरकार द्वारा आयोजित विदेशी मीडियाकर्मियों के ल्हासा भ्रमण कार्यक्रम में खलल डालने वाले तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं के खिलाफ चीन कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने चीन के कब्जे वाले स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र के उपाध्यक्ष बएमा चिलियान के हवाले से कहा है कि अलगाववादी तत्व इस साल पेइचिंग में होने वाले ओलिंपिक खेलों की मशाल रैली को बाधित करने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने मशाल रैली की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा करते हुए कहा कि यह रैली पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही आयोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि शुक्रवार को तिब्बत के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक जोखांग मंदिर में करीब 30 बौद्ध भिक्षुओं ने पत्रकारों को रोककर उनसे कहा था कि तिब्बत के मौजूदा हालात को लेकर चीनी सरकार झूठ बोल रही है।

चिलियान के मुताबिक प्रदर्शनकारी बौद्ध भिक्षुओं को सजा नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भिक्षुओं द्वारा चीन की सरकार पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और वे विश्व मत को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी ओर तिब्बत में जारी गतिरोध के बीच पेइचिंग ओलिंपिक के उद्‍घाटन अवसर पर शामिल होने के मसले पर यूरोपीय यूनियन में विभाजन उभरकर सामने आ गया है।

स्लोवेनिया में शनिवार से शुरू होने वाली यूरोपीय यूनियन की बैठक से पहले इंग्लैंड ने कहा है कि प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन पेइचिंग ओलिंपिक खेलों के उद्‍घाटन अवसर पर मौजूद रहेंगे, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने सार्वजनिक रूप से इसका बहिष्कार करने की सम्भावना को जाहिर किया।

उधर जर्मनी ने कहा है कि उसके मंत्री फ्रैंक वॉल्टर तथा चांसलर एंजेला मर्केल पेइचिंग ओलिंपिक खेलों के उद्‍घाटन कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। उसने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि तिब्बत में जारी गतिरोध इसकी वजह कतई नहीं है।

यूरोपीय यूनियन के ज्यादातर प्रतिनिधि 'देखो और इंतजार करो' की नीति पर चलते दिखाई दिए।
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