क्या आप जानते हैं कि आपकी नाक न केवल आसपास के वातावरण के प्रति आपसे अधिक संवेदनशील होती है, बल्कि वह आने वाले खतरे को भी पहले ही भाँप लेती है।
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक अध्ययन में पाया कि जब भी कुछ अप्रिय होता है तो इंसान की नाक उसे पहले ही पहचान लेती है। प्रमुख ब्रिटिश दैनिक 'दी डेली टेलीग्रॉफ्र' ने शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
नार्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. वेन ली के अनुसार यह विकास की प्रक्रिया है। इससे हमें बेहद संवेदनशील क्षमता हासिल होती है, जिससे हम पर्यावरणीय सूचनाओं के महासागर में से ऐसी चीज का पता लगा लेते हैं जो हमारे अपने अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
इस शोध में 12 स्वयंसेवकों के समूह को एक ही चीज की दो प्रकार की महक सूँघाई गई, जिनमें वे पहले विभेद करने में सक्षम नहीं हो पाए थे।
पहले तरह की खूशबू को सूँघने के दौरान समूह के सदस्यों को हल्का इलैक्ट्रिक झटका सा लगा, लेकिन इसी वस्तु की दूसरी महक को सूँघते समय ऐसा नहीं हुआ।
केवल झटका लगने पर ही सदस्य एक ही प्रकार की दो अलग-अलग खुशबुओं में भेद करने में सक्षम हो सके।
शोधकर्ताओं ने इसके बाद मस्तिष्क के ओलफैक्ट्री कोर्टेक्स हिस्से में सक्रियता को दर्शाने के लिए एमआरआई का इस्तेमाल किया। जब एक सदस्य ने इलैक्ट्रिक झटके से संबद्ध कर किसी खुशबू को पहचाना तो दिमाग के इस हिस्से में बड़ा बदलाव देखा गया।
डॉ. ली ने बताया यह खोज नई उपचारात्मक प्रक्रियाओं के विकास का एक प्रारूप उपलब्ध करा सकती हैं। यह अध्ययन रिपोर्ट साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है।
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