संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि नेपाल के तराई क्षेत्र में चीन सरकार के दमनचक्र के खिलाफ तिब्बतियों के 13 से 29 फरवरी के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों से निपटने में कई बार सुरक्षा बलों ने अत्यधिक बल प्रयोग किया।
एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार अधिकारियों ने कहा है कि तराई क्षेत्र में कुछ समय पहले फैली विनाशकारी हिंसा के दोहराव से बचने के लिए पुलिस समेत नेपाल के जनसुरक्षा संस्थानों को मानवाधिकारों के प्रति सम्मान बरतना होगा।
रिपोर्ट में छह लोगों की मौत की जाँच के बाद अधिकारी इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि इन सभी मामलों में घातक बल प्रयोग उचित नहीं था। इनमें से पाँच की मौत पुलिस गोलीबारी के कारण हुई थी।
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रतिनिधि रिचर्ड बैनेट ने कहा है वे इस बात को मानते हैं कि पुलिस समेत नेपाली प्रशासन जनसुरक्षा में सुधार के प्रयास कर रहा है। उन्होंने साथ ही जनसुरक्षा के मुद्दे पर मानवाधिकार मामले में सरकार के साथ पूरा सहयोग करने की भी प्रतिबद्धता जाहिर की है।
उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट बताती है कि तराई प्रदर्शनों के दौरान पुलिस का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप नहीं था। हालाँकि इस बात का भी संज्ञान लिया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनों के दौरान कठिन हालात में काम किया। उस समय प्रदर्शनकारियों ने उस पर हमला किया।
रिपोर्ट में बंद और प्रदर्शन आयोजकों से भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए हिंसा से बचने अन्य लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करने तथा बच्चों को हिंसक स्थिति से दूर रखना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नेपाल में दस अप्रैल को होने जा रहे संविधान सभा के चुनाव को लेकर की जा रही तैयारियों का स्वागत किया है।
संविधान सभा के चुनाव होने के बाद इसके सदस्य नेपाल के नए संविधान का मसौदा तैयार करेंगे। नेपाल में एक दशक तक चले गृहयुद्ध में अनुमानत: 13 हजार लोग मारे जा चुके हैं। वर्ष 2006 में सरकार तथा माओवादी विद्रोहियों के बीच शांति समझौता होने के बाद गृहयुद्ध समाप्त हुआ था।
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