तिब्बत की राजधानी ल्हासा के एक प्रमुख मठ में चीन प्रशासन की ओर से आयोजित विशेष संवाददाता सम्मेलन के दौरान तिब्बती भिक्षुओं के समूह ने आकर कहा कि सरकार क्षेत्र में दो हफ्ते से ज्यादा अर्से से व्याप्त असंतोष के बारे में झूठ बोल रही है। यह जानकारी प्रत्यक्षदर्शियों ने दी।
प्रशासन की ओर से कल कुछ चुनींदा विदेशी और चीन के पत्रकारों को ल्हासा के तीन दिन के सरकारी दौरे पर लाया गया था। प्रशासन यह संकेत देना चाहता था कि तिब्बत में हालात सामान्य हैं, जहाँ गत 14 मार्च से चीन विरोधी हिंसा के कारण अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। जोखांग मठ में संवाददाता सम्मेलन चल ही रहा था कि तभी तिब्बती भिक्षुओं का एक समूह वहाँ आ पहुँचा।
यूएसए टूडे के एक संवाददाता केल्लुम मैकलॉड ने बताया कि करीब 30 भिक्षुओं ने वहाँ आकर कहा कि इन पर यकीन मत करो, ये आपके साथ चालबाजी कर रहे हैं। ये लोग झूठ बोल रहे हैं। कुछ भिक्षुओं ने कहा कि उन्हें गत 10 मार्च से जोखांग मठ से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा।
ताइवान के ईटीटीवी के कैमरामैन वांग शे नैन ने बताया कि यह घटनाक्रम करीब 15 मिनट तक चला। उसके बाद पुलिसकर्मी उन भिक्षुओं को पत्रकारों से दूर मठ के दूसरी ओर ले गए।
वांग ने बताया कि यह पता नहीं चल सका कि बाद में उन भिक्षुओं के साथ क्या सुलूक किया गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने संवाददाताओं के नोट्स या फिल्में जब्त नहीं की लेकिन उनसे वहाँ से चलने कहा। उन्होंने कहा कि यहाँ समय पूरा हो गया अब दूसरी जगह जाने का समय आ गया है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने केवल इतनी खबर दी है कि मीडिया दौरे में कुछ भिक्षुओं ने बाधा पहुँचाई, लेकिन जल्द ही स्थिति संभल गई और तिब्बत में भी हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इन भिक्षुओं को तिब्बत में लामा के नाम से जाना जाता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने कल चीन के राष्ट्रपति हू चिनताओ से दलाई लामा से बातचीत करने का अनुरोध किया था लेकिन हू का कहना है कि दलाई लामा को तिब्बत और ताइवान की आजादी के समर्थन जताना छोड़ना होगा तथा ओलिंपिक खेलों में बाधा डालने के लिए की जा रही हिंसा को बढ़ावा देना रोकना होगा।
दलाई लामा तिब्बत में जारी असंतोष के पीछे अपना हाथ होने संबंधी चीन इन आरोपों को गलत ठहराते रहे हैं। उन्होंने आज एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा कि ओलिंपिक खेल चीन उसके यहाँ के मानवाधिकारों का रिकॉर्ड याद दिलाने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि ओलिंपिक खेलों का अच्छा मेजबान बनने के लिए चीन को मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का अपना रिकॉर्ड सुधारना होगा। शुक्रवार को प्रसारित होने वाले इस साक्षात्कार में दलाई लामा ने कहा है कि यह बहुत ही तर्क संगत और जायज बात है।
चीन ने तिब्बत क्षेत्र में व्याप्त असंतोष पर काबू पाने के लिये वहाँ काफी तादाद में सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। ह्मूमन राइट्स वॉच के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार लाना चाहिए। संगठन के बयान में कहा गया है कि वहाँ के मसले को सुलझाना परिषद का अधिकार ही नहीं दायित्व भी है।
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