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अमेरिका ने पाक में हमले तेज किए
पाकिस्तान की नई सरकार से सैन्य कार्रवाइयों में भरपूर समर्थन नहीं मिलने की आशंका की वजह से अमेरिका ने वहाँ के कबाइली इलाकों में अल कायदा ठिकानों पर एकतरफा हमले तेज कर दिए हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर दी गई है कि अमेरिका को चिंता है कि आने वाले महीनों में पश्चिमी देशों के समर्थक और आतंकवादियों के खिलाफ हमलों का समर्थन करने वाले राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की शक्तियाँ घट जाएँगी। इसलिए वह अल कायदा नेटवर्क को जितनी ज्यादा संभव हो सके उतनी हानि पहुँचाना चाहता है।

पिछले तीन महीनों में अमेरिकी विमानों ने अल कायदा के कम से कम तीन ठिकानों को निशाना बनाया है। पाकिस्तान से गतिविधियाँ चला रहे विदेशी आतंकवादियों पर ये हमले मुशर्रफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख अशफाक कियानी के साथ सहमति के बाद किए गए, लेकिन ये हमले पाकिस्तानी तालिबानियों को निशाना बनाकर नहीं किए गए।

अधिकारियों बताया कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादने समते संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में पुख्ता जानकारियाँ उपलब्ध कराना था।

खबर में अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सैन्य अभियान का उद्देश्य राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल से पहले अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को पकड़ना नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसा हरगिज नहीं है। यदि अल कायदा नेतृत्व का कोई सुराग मिलेगा तो उसका पीछा किया जाएगा। लेकिन महज नौ या दस महीनों में अल कायदा का सफाया करने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता।

अन्य अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि बुश प्रशासन और अमेरिका सरकार के बीच सटीक हमले करने के लिए एक सहमति बन गई थी। उन्होंने बताया कि यह मसला संवेदनशील है और कोई भी इस बारे में खुलकर नहीं कहता चाहता। हालाँकि अमेरिकी रक्षा विभाग के जिऑफ मोर्रेल ने ऐसी किसी सहमति बनने से इनकार किया है।
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