इतिहास रचते हुए भारत के सर्वश्रेष्ठ टाटा समूह ने बुधवार को फोर्ड मोटर से 2.3 अरब डॉलर में प्रतिष्ठित लग्जरी ऑटो ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा जैसे घरेलू प्रतिद्वंद्वी सहित अन्य के साथ नौ महीने से चल रहे संघर्ष को विराम दे दिया।
कोरस को 12.1 अरब डॉलर में खरीदने के सिर्फ एक साल के बाद टाटा ने फोर्ड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने इस सौदे को सार्वजनिक करते हुए कहा कि हम अपने ऑटोमोटिव कारोबार के प्रमुख अंग के तौर पर जगुआर और लैंड रोवर की तमाम संभावनाओं को लेकर खुश हैं।
उन्होंने कहा कि इस दोनों ब्रांडों के लिए हमारे मन में बहुत इज्जत है। हम इसे बरकरार रखने का प्रयास करेंगे और उनकी विरासत और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेंगे। उनकी पहचान को अक्षुण्ण रखेंगे।
सनद रहे कि पिछले साल आंग्ल डच इस्पात निर्माता कोरस का अधिग्रहण किया गया था। कोरस के अधिग्रहण ने टाटा को सबसे बड़ी विदेशी खरीद करने वाली भारतीय कंपनी बना दिया था।
कोरस का अधिग्रहण टाटा के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सौदा टाटा स्टील की स्थापना के सौवें वर्ष पर हुआ। अब जेएलआर का अधिग्रहण टाटा को वैश्विक कॉरपोरेट मानचित्र पर एक याद किए जाने लायक नाम के तौर पर मजबूती से स्थापित करने में मदद करेगा। भारत में टाटा के नाम से हर कोई परिचित है। इन सौदों ने इस समूह के नाम से विश्वभर को परिचित करा दिया है।
टाटा के कारोबार की लगाम 1991 में अपने हाथों में लेने के बाद से रतन टाटा ने इस समूह की निष्ठा, कीर्ति और क्षमता को बढ़ाया ही है। रतन टाटा ने कहा कि मुझे हमेशा यह भरोसा रहा है कि यदि आप वैश्विक कंपनी बनना चाहते हैं, तो आपको एकल राष्ट्रीयता के भाव को खत्म करना पड़ेगा।
हालाँकि इस्पात सम्राट लक्ष्मी निवास मित्तल को अधिग्रहण शिकारी कहा जाता है, लेकिन उनका कारोबार इस्पात तक ही सीमित है, जबकि रतन टाटा सही मायनों में अधिग्रहण सम्राट बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपने से ज्यादा बड़ी कंपनी खरीदी और एक अरब डॉलर के रासायनिक कारोबार का अधिग्रहण किया।
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