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सरकार या करार की बलि के आसार नहीं
भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौता या देश की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की बलि चढ़ाने की सम्भावना से इन्कार करते हुए कहा है इस मुद्दे पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए सहयोगी दलों से बातचीत के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं।

मुखर्जी कल यहां एक सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या संप्रग अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा करार के लिए अपनी सरकार की बलि देगा या नहीं।

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि यह करार अथवा सरकार को कुर्बान करने का सवाल नहीं है। इस समय हम मामले को लेकर अपने सहयोगी वामदलों के साथ जारी तल्खी को दूर करने के लिए बैठक करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने हालाँकि कहा कि संप्रग सरकार अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौता करने की इच्छुक है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें बढ़ रही हैं और उसे ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की तरफ भी देखना होगा।

करार को लेकर हो रही दिक्कतों का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा कि इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है मगर ऐसा होने में थोड़ा समय लगेगा। अगर मामले पर आम सहमति बन गई तो करार की प्रक्रिया में तेजी लाना सम्भव हो जाएगा।

परमाणु समझौते पर आम सहमति पर लगने वाले समय के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कोशिशें जारी हैं मगर उनके नतीजे के बारे में किसी तरह की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु करार पर आम सहमति बनाना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की खराब स्थिति से बचा जा सके।

इसके पूर्व भारतीय विदेश मंत्री ने अपने लिखित बयान में कहा था कि भारत और अमेरिका के आपसी रिश्ते बहुत मजबूत तथा अग्रगामी हैं। ये सम्बन्ध दोनों देशों के हित में हैं।
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