पहले टीवी ड्राइंग रूम से निकलकर बेडरूम में आया, फिर ऑफिस से घरों में कम्प्यूटर आया और अब कम्प्यूटर को बैठक कक्ष में रखने की बात कही जा रही है।
यह बात कोई और नहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन द्वारा कराए गए एक अध्ययन से सामने आई है।
अध्ययन करने वाली तान्या बेरन टीवी पर आने वाली एक मनोविज्ञान विशेषज्ञ हैं। वे कहती हैं कि बच्चों के कमरों में कम्प्यूटर रखने से माता-पिता यह नहीं देख सकते कि बच्चा उसके साथ या उसमें क्या कारगुजारी कर रहा है, लेकिन बैठक कक्ष में रखने से उस पर निगाह रखी जा सकती है। वे कहती हैं कि बच्चों पर वीडियो और ऑनलाइन गेम का असर खासा देखने में आया है।
बच्चों के लिए कम्प्यूटर वहीं लगाना चाहिए, जहाँ से माता-पिता आसानी से नजर रख सकें। कहने का मतलब यह है कि बच्चों को घर के बड़ों की निगरानी में कम्प्यूटर चलाने की अनुमति होना चाहिए।
यह सही है कि पीढ़ियों के बीच तकनीकी समझ को लेकर आया अंतर कम किया जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता भी इंटरनेट, वीडियो गेम और अन्य चीजों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी रखें।
किशोर और युवाओं में तेजी से बढ़ती हिंसा के बाद प्रधानमंत्री ने सोचा क्यों न इसके कारणों के लिए शोध कराया जाए। तान्या बेरन ने इस संबंध में कई बच्चों, मनोवैज्ञानिकों, उद्योग जगत और माता-पिता से चर्चा की।
उन्होंने एक और गंभीर सवाल उठाया, जो वीडियो गेम्स के प्रमाणन के नियमों को लेकर था। यह माना जाता है कि बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान वीडियो गेम्स पहुँचाते हैं, इसको लेकर माता-पिता में भय व्याप्त होता है। वे यह नहीं कहतीं कि सभी गेम्स का नकारात्मक असर होता है। (नईदुनिया)
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