असैन्य परमाणु करार के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के दो टूक बात से परहेज किए जाने के बीच विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि देश में कुछ राजनीतिक समस्याएँ हैं, जबकि उनकी अमेरिकी समकक्ष कोंडालीजा राइस ने दावा किया कि वाशिंगटन इस पर काम जारी रखेगा। मुखर्जी ने कहा कि हम इस ऐतिहासिक समझौते को लागू करवाने के इच्छुक हैं, लेकिन अभी हमारी कुछ राजनीतिक समस्याएँ हैं। फिलहाल हम उनका हल निकालने की कोशिश में हैं। यह बात उन्होंने कोंडलीजा के साथ करीब आधे घंटे चली बैठक के बाद संवाददाताओं से कही। विदेशमंत्री की अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ अलग से बैठक होने की संभावना है। विदेशमंत्री के रूप में अपनी पहली द्विपक्षीय अमेरिकी यात्रा पर गए मुखर्जी ने कहा कि उनकी सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत कर रही है।
इस करार को आगे बढ़ाने की अमेरिका की इच्छा का इजहार करते हुए कोंडालीजा ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता है, जो दोनों पक्षों के लिए अच्छा है। हम इस पर काम करना जारी रखेंगे।
भारत आधारित सुरक्षा मानकों पर आईएईए के साथ बातचीत के बारे में मुखर्जी ने कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है। इस सहमति को आईएईए के संचालन मंडल की सहमति मिलना और इसका शुरू किया जाना अभी बाकी है।
भारत को आईएईए के साथ समझौता करना है तथा 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में बदलाव करवाने हैं ताकि इसके साथ परमाणु कारोबार शुरू किया जा सके।
वाम दल परमाणु करार का इसके मौजूदा स्वरूप में कड़ा विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को धमकी दी है कि यदि इसे लागू किया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं।
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