संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के अनुसार विश्व में कम से कम 10 करोड़ बच्चे अंशत या पूर्णत: गलियों में दिन गुजारने को मजबूर हैं। हालाँकि इस संबंध में विश्वसनीय आँकड़े एकत्र करना मुश्किल है।
यूनीसेफ ने वर्ष 2008 की अपनी रपट 'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन' में 60 प्राथमिकता वाले देशों को शामिल किया गया है, जहाँ बच्चों की सुरक्षा और जीवन-यापन के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है।
इनमें से दो तिहाई यानी लगभग 38 देश उप सहारा अफ्रीकी के देश हैं। इस सूची में भारतीय उपमहाद्वीप को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ ब्राजील, हैती और मैक्सिको भी शामिल हैं।
रपट के अनुसार काफी संख्या में बच्चे शोषण, प्रताड़ना हिंसा और गाली-गलौज के शिकार होते हैं। गलियों में रहकर जीवन-यापन करने वाले ऐसे बच्चों में अधिकतर एशिया अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया के हैं। इसके अलावा पूर्वी यूरोप और पूर्व सोवियत संघ के कई क्षेत्रों में यह समस्या काफी गंभीर है।
यूनीसेफ की रपट के अनुसार दक्षिण एशिया में नौ प्रतिशत लड़कियाँ और 10 प्रतिशत बच्चे प्राथमिक स्कूली शिक्षा से वंचित हैं, जबकि उप सहारा अफ्रीकी देशों की 40 प्रतिशत लड़कियाँ और 36 प्रतिशत लड़कों का नामांकन प्राथमिक स्कूली स्तर पर नहीं हुआ है।
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