पार्किन्सन बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए वैज्ञानिकों ने एक उम्मीद की किरण पैदा कर दी है। वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग के जरिए पार्किन्सन का इलाज होने का दावा किया है जिसमें मरीज के ही मस्तिष्क के उतकों की खेती कर क्षतिग्रस्त मस्तिष्क उतकों को दुरुस्त किया जा सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया है कि उपचारात्मक क्लोनिंग का इस्तेमाल पार्किन्सन बीमारी के इलाज में किया जा सकता है। यह बीमारी लोगों की चलने-फिरने और खाने पीने की क्षमता तक को नष्ट कर देती है। उपचारात्मक क्लोनिंग के जरिए ही डोली भेड़ का निर्माण किया गया था।
अमेरिका के मैमोरियल (सोलान) केटरिंग कैंसर सेंटर के प्रमुख शोधकर्ता लोरेंज स्टूडर ने बताया कि क्लोन कोशिकाएँ काफी लाभदायक हैं, क्योंकि आनुवांशिक रूप से मरीज को पहचानती हैं और वे नकारी नहीं जाती।
शोधकर्ताओं का यह दल चूहे की पूँछ की कोशिकाओं को एम्ब्रायोनिक सेल्स में परिवर्तित करने के लिए न्यूक्लियर ट्रांसफर क्लोनिंग विधि का सफल इस्तेमाल करने के बाद इस नतीजे पर पहुँचा। इसके बाद इन सेल्स को नर्व सेल्स में परिवर्तित किया गया।
शोधकर्ताओं ने पार्किन्सन से पीड़ित 24 चूहों की नर्व सेल्स की 187 रेखाएँ हासिल कीं। जिन चूहों में उनके अपने क्लोन एम्ब्रोयोस से लिए गए एक लाख न्यूरोन डाले गए उनके मस्तिष्क में सुधार देखा गया। नेचर मेडिसिन ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।
शोधकर्ताओं के अनुसार शोध का मकसद विशेष नर्व सेल्स का सृजन करना है जो संकेत देने वाले रसायन डोपामाइन का उत्पादन करे। पार्किन्सन में डोपामाइन नष्ट हो जाता है। हालाँकि इंसानों में इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए काफी लंबा सफर तय करना होगा। अभी यही कहा जा सकता है कि शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे प्रयोगशाला में उगाई गई पार्किन्सन मरीजों की मस्तिष्क कोशिकाओं पर नई दवाओं का परीक्षण कर सकेंगे। जर्नल में कहा गया है भविष्य के लिए इस खोज में काफी उपचारात्मक संभावनाएँ हैं।
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने शोध का स्वागत किया है। दि डेली टेलीग्राफ ने पार्किन्सन डिजीज सोसायटी के डॉ. केरेन ब्रीन के हवाले से लिखा है यह रोमांचकारी घटनाक्रम है। ऐसा पहली बार संभव हो सकेगा कि हम पार्किन्सन का इलाज करने के लिए किसी व्यक्ति के खुद के एम्ब्रायोनिक स्टेम सेल्स को सृजित कर सकें।
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