पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री एवं पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता नवाज शरीफ ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से अपने अधिकार नवनिर्वाचित संसद को सौंपने और गरिमापूर्ण ढंग से गद्दी छोड़ देने को कहा है।
पश्चिमोत्तर मनशेरा कस्बे में जनसमुदाय को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि सैनिक तानाशाहों की वजह से देश काफी कष्ट भुगत चुका है। उन्होंने कहा कि 18 फरवरी के चुनावों में आवाम ने मुशर्रफ की नीतियों को नकार दिया है और अब राष्ट्रपति के पास अपने अधिकार निर्वाचित संसद के हवाले करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा।
भावी गठबंधन सरकार को मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के समर्थन के बारे में शरीफ ने कहा कि एमक्यूएम ने हमारे गठबंधन सहयोगियों से बातचीत की है लेकिन कराची में 12 मई 2007 में सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इफ्तिखार अहमद चौधरी की यात्रा के दौरान हुए राजनीतिक कार्यकताओं के नरसंहार को ध्यान में रखते हुए हमें इस पर कड़ी आपत्ति है।
शरीफ ने बताया कि पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की सरकार में शामिल होने के लिए पीएमएल.एन की बातचीत जारी है। शरीफ ने कहा कि पीएमएल (एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को दो तिहाई बहुमत हासिल है जिससे देश में लोकतंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
निर्वाचित प्रतिनिधियों को और ज्यादा अधिकार दिए जाने की वकालत करते हुए शरीफ ने कहा कि उन्हें सेनाध्यक्ष और सूबों के गवर्नर नियुक्त करने का अधिकार होना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ जारी युद्ध के बारे में शरीफ ने कहा कि नई संसद अतीत में उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी। शरीफ ने कहा कि संसद राष्ट्र हित में कानून पारित करेगी जिसमें जनता की आकांक्षाएँ परिलक्षित होंगी।
भावी सरकार की प्राथमिकताएँ गिनाते हुए शरीफ ने कहा कि बढ़ती कीमतों और बेरोजगारी पर काबू पाने, स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया कराने तथा शांति बहाली करने पर ध्यान देगी।
शरीफ ने कहा कि यह समझने का वक्त अब आ गया है कि तानाशाही लोकतांत्रिक शासन का विकल्प नहीं हो सकती।
|