मुशर्रफ सरकार ने पाकिस्तान के अशांत सीमांत क्षेत्र में अल कायदा लक्ष्यों पर अमेरिकी चालकरहित विमानों के हमले की मौन स्वीकृति दे दी है और इन हमलों में तेजी ला दी गई है क्योंकि उन्हें डर है कि नई असैनिक सरकार इन हमलों के खिलाफ है।
जनवरी से सीआईए संचालित प्रीडेटर ड्रोन विमानों से दागी मिसाइलें उग्रवादियों के कम से कम तीन संदिग्ध ठिकानों पर गिरी हैं। इनमें दक्षिण वजीरिस्तान के तूक गाँव पर 16 मार्च को गिरी मिसाइल शामिल है, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी।
न्यूजवीक ने अमेरिकी अधिकारियों और पाकिस्तानी स्त्रोत के हवाले से बताया कि प्रीडेटर के हमलों में हाल में आई तेजी कम से कम अंशत: मुशर्रफ और शीर्ष पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ समझ का नतीजा है। इसने अमेरिका को वस्तुत: पाकिस्तान के सरहदी इलाके में लक्ष्यों पर हमला करने का वस्तुत: बेरोकटोक प्राधिकार मिल गया है।
अमेरिकी पत्रिका ने अपने आगामी अंक में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी प्रीडेटर ड्रोन के हमलों में यह तेजी इस साल की शुरूआत में अमेरिकी अधिकारियों की पाकिस्तान यात्रा के बाद आई है।
साल की शुरुआत में जिन अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान की यात्रा की उनमें वरिष्ठ खुफिया अधिकारी माइक मैककान्नेल, सीआईए निदेशक जनरल माइकल हैडन और क्षेत्र में अमेरिकी फौज के कमांडर की हैसियत से हाल में इस्तीफा देने वाले एडमिरल विलियम फालोन शामिल हैं।
क्षेत्र के एक पूर्व सीआईए विशेषज्ञ ब्रुस रीडेल ने कहा कि पाकिस्तान के अंदर उग्रवाद की नयी लहर में पिछले साल 62 हमले हुए। इसके खिलाफ 2006 में महज छह हमले हुए।
इन हमलों ने मुशर्रफ और नए सेना प्रमुख अश्फाक कयानी को यह स्वीकार करने के लिए बाध्य कर दिया है कि अमेरिकियों के लिए खतरा बने उग्रवादी अब पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।
एक अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि प्रीडेटर हमलों में तेजी का एक और कारण यह है कि अमेरिका को यह भय सता रहा है कि नई बनने वाली कोई भी असैनिक सरकार मुशर्रफ की मौजूदा सरकार की तुलना में अमेरिकी कार्रवाइयों के ज्यादा खिलाफ होगी।
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