दलाई लामा के साथ निकटता बढ़ाने के अमेरिकी सांसदों के प्रयासों से चिढ़े चीन ने रविवार को दावा किया कि तिब्बत पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। इस सब के बीच चीन की लाल सेना को तिब्बत के विभिन्न इलाकों में विद्रोह को कुचलने के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा चीन ने तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा पर ओलिंपिक खेल को बाधित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। इधर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्विन गांग ने बताया कि भारत ने तिब्बत को चीन का आंतरिक मसला बताते हुए चीन को आश्वस्त किया कि तिब्बत पर उसका रुख स्पष्ट और नियत है तथा भविष्य में इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा। प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने यह भी साफ किया है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का दलाई लामा से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है और इस तरह की बैठक की खबरें अफवाह हैं।
इस बीच तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने आज चीन के इस आरोप का खंडन किया कि वे अपनी गतिविधियों से चीन में होने वाले ओलिंपिक खेल को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में चीन के आरोप संबंधी एक प्रश्न के जवाब में दलाई लामा ने कहा कि चीन का यह आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने हमेशा चीन में ओलिंपिक खेलों के आयोजन का समर्थन किया है।
इधर दलाई लामा और नैंसी पेलोसी की मुलाकात तथा इससे जुड़े घटनाक्रम पर चीन ने दूसरे देशों और विदेशियों को उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के प्रति चेताया।
पेलोसी को आड़े हाथों लेते हुए चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने उन पर तिब्बती दंगाइयों द्वारा की गई हिंसा को नजरंदाज करने का आरोप लगाया। एजेंसी ने कहा कि जब मामला चीन से जुड़ा होता है तो पेलोसी जैसी मानवाधिकारों की पैरोकार बिना तथ्य की जाँच किए कूद पड़ती हैं।
इस बीच लंदन में सैकड़ों लोगों ने आजादी समर्थक तिब्बतियों पर चीन के दमनचक्र के विरोध में मार्च निकाला। लंदन के रेजेंट पार्क से ट्रैफल्गर स्क्वेयर तक निकाले मार्च में कई निर्वासित तिब्बतियों ने हिस्सा लिया। मार्च में शामिल लोगों ने चीनी दूतावास के बाहर तिब्बती राष्ट्रगान के साथ विरोध प्रदर्शन भी किया।
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